चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में कार्यरत सहायक प्राध्यापक डॉ. धर्मेंद्र रजक को शोध के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। झारखंड काउंसिल ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन (JCSTI) ने उन्हें तीन साल की अवधि के लिए एक महत्वपूर्ण दीर्घकालीन शोध परियोजना की स्वीकृति प्रदान की है।

डॉ. रजक के इस शोध का विषय “मल्टीमॉडल एक्सप्लेनेबल एआई फ्रेमवर्क फॉर अर्ली प्रेडिक्शन ऑफ ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर” है। यह प्रोजेक्ट आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और मनोविज्ञान के अंतर्विषयक समन्वय पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न डेटा और संकेतों का वैज्ञानिक विश्लेषण करके एक ऐसा एआई सिस्टम तैयार करना है, जो बच्चों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के शुरुआती लक्षणों की समय रहते पहचान कर सके। इस तकनीक में ‘एक्सप्लेनेबल एआई’ का उपयोग किया जाएगा, जिससे एआई द्वारा निकाले गए निष्कर्षों के पीछे के कारणों को आसानी से समझा जा सकेगा।
यह अध्ययन बच्चों में ऑटिज्म के लक्षणों की समय पर पहचान, सटीक मूल्यांकन और शुरुआती डॉक्टरी मदद की दिशा में नए दरवाजे खोलेगा। मनोविज्ञान और आधुनिक तकनीक के इस अनूठे मिलाप से तैयार होने वाला वैज्ञानिक मॉडल भविष्य में अनुसंधान और क्लिनिकल डायग्नोसिस के क्षेत्र में काफी मददगार साबित हो सकता है। इस उपलब्धि को कोल्हान विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी शैक्षणिक और अनुसंधान संबंधी सफलता माना जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय में अंतर्विषयक (Interdisciplinary) शोध और आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। विश्वविद्यालय परिवार ने डॉ. धर्मेंद्र रजक को इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति पर बधाई दी है।


