इन दिनों रामायण और वाराणसी जैसी बड़ी फिल्मों की चर्चा सिर्फ उनकी कहानी या स्टारकास्ट को लेकर नहीं, बल्कि उनके भारी-भरकम बजट को लेकर भी हो रही है। इसी मुद्दे पर मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म का बजट या बॉक्स ऑफिस कमाई दर्शकों के लिए मायने नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इससे उनका कोई सीधा लाभ नहीं होता।

बजट का प्रचार सिर्फ पब्लिसिटी का हिस्सा
एक इंटरव्यू के दौरान मनोज बाजपेयी ने कहा कि फिल्मों के बजट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना और उसकी चर्चा करना आजकल एक तरह का पब्लिसिटी स्टंट बन चुका है। उनके अनुसार, पिछले 15 वर्षों से फिल्म इंडस्ट्री में यह ट्रेंड लगातार बढ़ा है। मेकर्स अक्सर फिल्मों को बड़ा और सफल दिखाने के लिए करोड़ों रुपये के बजट और कमाई के आंकड़ों का प्रचार करते हैं।

मनोज ने कहा कि यह स्थिति इतनी आम हो गई है कि अब एयरपोर्ट पर मिलने वाले लोग भी उनसे फिल्मों के कलेक्शन और कमाई के आंकड़े पूछते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह पैसा दर्शकों के बैंक खाते में नहीं जाता, इसलिए उन्हें इन आंकड़ों की बजाय फिल्म की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
‘रामायण’ और ‘वाराणसी’ के मेगा बजट ने खींचा ध्यान
रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में से एक मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इसका बजट करीब 4,000 करोड़ रुपये है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, सनी देओल हनुमान, रवि दुबे लक्ष्मण और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे।
वहीं, निर्देशक एस.एस. राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ का बजट लगभग 1,400 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। फिल्म में महेश बाबू मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जबकि प्रियंका चोपड़ा साउथ सिनेमा में वापसी करती दिखाई देंगी। खास बात यह है कि यह भारत की पहली फिल्म होगी जिसे पूरी तरह आईमैक्स फॉर्मेट में शूट किया जाएगा।
दर्शकों को कहानी और मनोरंजन पर देना चाहिए ध्यान
मनोज बाजपेयी का मानना है कि दर्शकों को फिल्म की कमाई या बजट के बजाय उसकी कहानी, अभिनय और मनोरंजन मूल्य पर ध्यान देना चाहिए। आखिरकार, किसी फिल्म की असली सफलता दर्शकों के दिलों में उसकी जगह से तय होती है, न कि केवल करोड़ों के आंकड़ों से।


