
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी हालिया फिल्म ‘गवर्नर’ को थिएटर्स में कम स्क्रीन मिलने के बाद भारतीय फिल्म वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़े बजट की फिल्में अक्सर थिएटर मालिकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर दबाव बनाकर अधिकतर शोज अपने नाम कर लेती हैं, जिससे छोटे और स्वतंत्र सिनेमा के लिए जगह बेहद सीमित रह जाती है।
‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ की मांग
मनोज बाजपेयी ने साफ कहा कि इंडस्ट्री में सभी फिल्मों को बराबरी का मौका मिलना चाहिए। उनके अनुसार, छोटे बजट और कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों को भी थिएटर्स में समान अवसर मिलना जरूरी है। उन्होंने फिल्ममेकर रीमा कागती के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि छोटे सिनेमा को केवल दर्शकों के सपोर्ट की नहीं, बल्कि मजबूत संरचनात्मक संरक्षण की जरूरत है।
सरकार से नीतिगत बदलाव की अपील
अभिनेता ने सुझाव दिया कि इस समस्या का समाधान केवल पैसों से नहीं, बल्कि नीतिगत बदलावों से संभव है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मराठी फिल्मों के लिए स्क्रीन स्पेस सुनिश्चित किया गया है, जिससे क्षेत्रीय सिनेमा को काफी फायदा हुआ है। मनोज ने मांग की कि केंद्र सरकार भी ऐसी नीति लागू करे, जिससे हर फिल्म को न्यूनतम स्क्रीन गारंटी मिल सके और इंडिपेंडेंट सिनेमा को भी समान अवसर मिले।

