मैक्लुस्कीगंज की धरोहर पर मंडरा रहा खतरा! 20 एकड़ जमीन की प्लॉटिंग पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

मैक्लुस्कीगंज में 20 एकड़ जमीन की कथित प्लॉटिंग और बिक्री को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की, जबकि प्रशासन ने कार्रवाई की चेतावनी दी।

Razi Ahmad
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Khalari News : अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध मैक्लुस्कीगंज एक बार फिर भूमि कारोबार को लेकर चर्चा में है। खलारी अंचल के लपरा मौजा स्थित राणा कॉटेज के सामने करीब 20 एकड़ भूमि की खरीद-बिक्री और बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, मैक्लुस्कीगंज में वर्षों से जमीन का कारोबार तेजी से बढ़ा है, जबकि कई भूखंडों की कानूनी स्थिति, स्वामित्व और हस्तांतरण की वैधता को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है। कभी “मिनी लंदन” के नाम से पहचान रखने वाला यह क्षेत्र अपनी एंग्लो-इंडियन विरासत, विशाल बंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध रहा है।

एंग्लो-इंडियन समुदाय के सपनों का शहर

16 मई 1933 को स्वर्गीय ई.टी. मैक्लुस्की द्वारा स्थापित मैक्लुस्कीगंज को एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए एक विशेष आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया था। इसके लिए तत्कालीन रातू महाराजा से लगभग 10 हजार एकड़ भूमि पट्टे पर ली गई थी। समय के साथ यहां सैकड़ों खूबसूरत बंगले और योजनाबद्ध बस्तियां विकसित हुईं।

हालांकि, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बड़ी संख्या में एंग्लो-इंडियन परिवार विदेशों में बस गए, जिससे कई संपत्तियां वीरान हो गईं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी स्थिति का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने जमीनों पर कब्जा और खरीद-बिक्री का सिलसिला शुरू कर दिया।

20 एकड़ भूमि की प्लॉटिंग पर विवाद

ग्रामीणों का दावा है कि लपरा पंचायत क्षेत्र में करीब 20 एकड़ भूमि की प्लॉटिंग कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बेची जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस कथित भूमि कारोबार में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन जमीनों की बिक्री हो रही है, उनका वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और उनका हस्तांतरण किस कानूनी आधार पर किया जा रहा है।

सादा पट्टों पर जमीन बिक्री के आरोप

सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में कुछ जमीनों की खरीद-बिक्री कथित रूप से सादा पट्टों के आधार पर की जा रही है। मैक्लुस्कीगंज की बढ़ती पर्यटन संभावनाओं और विकास की उम्मीदों के कारण बड़ी संख्या में बाहरी लोग यहां निवेश कर रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि भविष्य में जमीनों के स्वामित्व या दस्तावेजों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, तो सबसे अधिक नुकसान उन खरीदारों को होगा जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी यहां निवेश की है।

विरासत बचाने की मांग तेज

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि मैक्लुस्कीगंज की ऐतिहासिक पहचान, एंग्लो-इंडियन संस्कृति और बहुमूल्य जमीनों को बचाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण कथित अवैध भूमि कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है।

प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि लपरा पंचायत सहित पूरे मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में हुई भूमि खरीद-बिक्री, प्लॉटिंग, रजिस्ट्री और स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।

सीओ की चेतावनी

खलारी अंचलाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रणव कुमार अंबष्ट ने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि जमीनों की खरीद-बिक्री सादा पट्टों या अन्य अवैध तरीकों से की जा रही है, तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भूमि संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि मैक्लुस्कीगंज की ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और भविष्य को बचाने का प्रश्न है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।