मोबाइल पीएलआई पर 19,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के बदले सरकार को करों से मिले 3.25 लाख करोड़ रुपये: वैष्णव

मोबाइल फोन उद्योग को 19,000 करोड़ रुपये का पीएलआई प्रोत्साहन देने के बदले सरकार ने 3.25 लाख करोड़ रुपये टैक्स जुटाए। अब भारत में स्मार्टफोन निर्माण बढ़ाने पर जोर है।

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नई दिल्ली: सरकार ने मोबाइल फोन उद्योग को 19,000 करोड़ रुपये का उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) देने के बदले इस क्षेत्र से कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये कर के रूप में जुटाए हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बुधवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने इस योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया और इसके बदले लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर तथा तीन लाख करोड़ रुपये माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में प्राप्त किए।

वैष्णव ने कहा, ‘‘इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में 25 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। केवल मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में 12 लाख लोग काम करते हैं। अब और ज्यादा कोशिश करें।’’ मंत्री की यह ‘पोस्ट’ एक मीडिया टिप्पणी वाले वीडियो के जवाब में आई। इस वीडियो में सार्वजनिक धन से सब्सिडी देकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की भारत की कोशिश की खामियों का दावा किया गया था और इसकी तुलना चीन में मौजूद परिवेश से की गई थी।

वीडियो के अनुसार, सब्सिडी की मदद से करदाताओं के पैसे से बनाए गए तैयार मोबाइल फोन के निर्यात से भारत को जितना लाभ होता है, उससे अधिक खर्च उसे कलपुर्जों के आयात पर करना पड़ता है। सरकार द्वारा मार्च में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में दो लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात किया। देश में मोबाइल फोन का आयात 2024-25 में घरेलू मांग का लगभग 0.02 प्रतिशत रह गया, जबकि 10 साल पहले यह 75 प्रतिशत था।

इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन 2014-15 के लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये से छह गुना बढ़कर 2024-25 में करीब 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग 0.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात भी 10 साल पहले के 0.38 लाख करोड़ रुपये से आठ गुना बढ़कर 2024-25 में करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। सरकार ने अब मोबाइल फोन के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये के कुल प्रोत्साहन वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे भारतीय स्मार्टफोन विकसित करना है, जिनका डिजाइन और विनिर्माण देश में ही किया जाएगा। वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अक्टूबर 2028 की समयसीमा तय की है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।