
संवैधानिक अधिकारों के लिए मुसलमानों को एकजुट करने का आह्वान
रांची: राजधानी में मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक एकजुटता को लेकर एक नए संगठन ‘मुस्लिम कॉन्फ्रेंस ऑफ भारत’ के गठन की घोषणा मंगलवार को की गई। घोषणा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देशभर के मुसलमानों को अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होने की जरूरत है।
रांची में बुद्धिजीवियों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुफ्ती अब्दुल्लाह अजहर कासमी ने कहा कि यह पहल देश के मुसलमानों के बीच जागरूकता और एकता बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के सभी मुसलमानों को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के समझदार और जागरूक लोगों की ओर से यह पहल देश के लिए एक नए संदेश के रूप में पेश की जा रही है। उनका दावा था कि इस पहल के माध्यम से देश में एक सकारात्मक माहौल बनाने और मुसलमानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
वक्ता ने कहा कि ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’के आधार पर मुस्लिम समाज को एकजुट करने की बात कही गई है। उन्होंने इसे मुस्लिम समाज की धार्मिक आस्था और एकता का आधार बताते हुए कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए समाज में न्याय और इंसाफ की भावना को मजबूत किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान ‘मुस्लिम कॉन्फ्रेंस ऑफ भारत’ के गठन की घोषणा करते हुए कहा गया कि यह संगठन सभी मुसलमानों के लिए न्याय और अधिकारों की आवाज उठाने वाला मंच होगा। इसमें किसी तरह के भेदभाव के बिना समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कही गई। वक्ता ने कहा कि संगठन को आगे बढ़ाने के लिए बुद्धिजीवियों की एक टीम के साथ जल्द ही विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि देशभर में संगठन के विस्तार और लोगों को इससे जोड़ने की दिशा में भी आगे काम किया जाएगा। इस मौके पर मुफ्ती अब्दुल्लाह अजहर कासमी, जकी इनाम, मो शोएब खान, मो नसीम राईन, अब्दुर रहमान, बबला राइन, प्रो शकील अहमद अंसारी, आदि उपस्थित थे।

