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संसद सत्र के पहले दिन ही पक्ष-विपक्ष में छिड़ गई जंग, इमरजेंसी को लेकर…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर लगा ‘काला धब्बा’ बताया, जिसका जवाब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने दिया।

Emergency Topic in First Session of Lok Sabha : सोमवार को संसद सत्र (Parliament Session) के शुरू होने के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष में इमरजेंसी (Emergency) को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर लगा ‘काला धब्बा’ बताया, जिसका जवाब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने दिया।

इमरजेंसी को लेकर प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर खड़गे ने कहा कि वे इसको लेकर 100 बार बात करेंगे। बिना इमरजेंसी लागू किए वे ऐसा कर रहे हैं। हर बार वे ऐसा ही कहते हैं। ऐसा कहकर आप कितने दिन शासन करना चाहते हैं।

क्या कहा PM मोदी ने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि इमरजेंसी की 50वीं बरसी के मौके पर देशवासी यह संकल्प लें कि भारत में फिर कभी कोई ऐसा कदम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि कल 25 जून है, जो लोग इस देश के संविधान की गरिमा के प्रति समर्पित हैं, जो लोग भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं पर विश्वास रखते हैं, वे 25 जून को कभी नहीं भूल सकते हैं।

कल 25 जून को भारत के लोकतंत्र पर जो काला धब्बा लगा था, उसके 50 साल पूरे हो रहे हैं।

इतिहास के आईने में इमरजेंसी का अक्स

बता दें कि देश में 25 जून 1975 को इमरजेंसी का ऐलान किया गया था, जो 21 मार्च, 1977 तक जारी रहा था। इस पूरे समय को आम लोगों की स्वतंत्रता के निर्मम दमन के तौर पर देखा जाता है।

इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के इस कदम का विरोध करने वाले नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था।

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