रांची विश्वविद्यालय और डीएसपीएमयू में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य ने की बैठक, जानें क्या कहा

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने रांची विश्वविद्यालय और डीएसपीएमयू की समीक्षा कर ट्राइबल छात्रों, शिक्षकों, प्रमोशन, छात्रवृत्ति और स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों पर निर्देश दिए।

Razi Ahmad
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Ranchi University : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने बुधवार को रांची विश्वविद्यालय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय की समीक्षा की। इस दौरान विश्वविद्यालयों में ट्राइबल विद्यार्थियों, प्रोफेसरों और कर्मचारियों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

आयोग ने दोनों विश्वविद्यालयों के अधिकारियों को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है, जिसे राज्य सरकार और यूजीसी को भेजा जाएगा।

डॉ. आशा लकड़ा ने प्रेस वार्ता में कहा कि रांची और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के पास अपने स्तर पर कोई अधिकार ही नहीं है। नियमावली के अभाव में ट्राइबल शिक्षकों की नियुक्ति, छात्रवृत्ति और प्रमोशन जैसे सभी महत्वपूर्ण मामले राज्य सरकार के निर्देश पर टिके हैं। यह पूरा सिस्टम यूनिवर्सिटी के पास होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में अधिकारी सिर्फ राज्य सरकार के आदेशों पर काम कर रहे हैं।

क्लस्टर सिस्टम से भाषाओं को नुकसान

समीक्षा में सामने आया कि शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए नए ‘क्लस्टर सिस्टम’ में खड़िया और संताली भाषा को एक साथ कंबाइंड कर दिया गया है। स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) से बिना चर्चा किए लिए गए इस निर्णय के कारण इन भाषाओं के विद्यार्थी सही ढंग से शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं।

इसके अलावा हर साल ट्राइबल डिपार्टमेंट से 25 से 30 छात्र जेआरएफ (JRF) के लिए चयनित होते हैं, लेकिन गाइड न मिलने के कारण वे पीएचडी नहीं कर पा रहे हैं। उरांव, मुंडा, हो और खड़िया जैसी जनजातीय भाषाओं के छात्रों को गाइड न मिलने से भविष्य में इन विभागों के लिए प्रोफेसर मिलना भी मुश्किल हो जाएगा।

10 साल से इंतजार

शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रमोशन की स्थिति भी बदतर है। जेपीएससी द्वारा ट्राइबल प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए परीक्षा तो ली गई, लेकिन आज तक उसका रिजल्ट नहीं जारी हुआ। कई योग्य प्रोफेसर पिछले 10 वर्षों से प्रमोशन की राह देख रहे हैं। यही हाल चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों का है, जो प्रमोशन के बाद पिछले 10 साल से ‘पे फिक्सेशन’ (वेतन निर्धारण) का इंतजार कर रहे हैं। अनुकंपा पर बहाल उच्च शिक्षित कर्मियों को भी विश्वविद्यालय स्तर पर रोस्टर न बनने के कारण प्रमोशन नहीं मिला है।

आयोग ने दिए निर्देश

वर्तमान में कल्याण विभाग केवल पीजी (PG) टॉपर्स को छात्रवृत्ति दे रहा है। आयोग ने निर्देश दिया है कि अब यूजी और पीजी दोनों के ट्राइबल टॉपर्स को स्कॉलरशिप दी जाए।विश्वविद्यालयों में एट्रोसिटी और मानसिक प्रताड़ना के मामले सामने आने के बाद आयोग ने तुरंत ‘इंटरनल ग्रीवांस रिड्रेसल सेल’ (आंतरिक शिकायत निवारण सेल) गठित करने को कहा है, जिसकी हर तीन महीने में समीक्षा बैठक होगी।

नियुक्ति और प्रमोशन में रोस्टर को सही तरीके से मेंटेन करने के लिए विश्वविद्यालयों में पूरी तरह प्रशिक्षित ‘लायजन ऑफिसर’ नियुक्त किए जाएंगे। डॉ. आशा लकड़ा ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि यूजीसी की गाइडलाइंस के तहत विश्वविद्यालयों को प्रशासनिक अधिकार और स्वायत्तता दी जाए, ताकि ट्राइबल समाज से जुड़े प्रोफेसरों, कर्मचारियों और छात्रों की समस्याओं का समाधान विश्वविद्यालय स्तर पर ही तुरंत किया जा सके।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।