घर की सुंदरता का बोध शायद वह लोग शायद न कर पाएं जो घर को टू बीएचके के नाम से जानते हैं

दीवारों पर अल्पनाएं, फूलों से सजे घर, झूले और कोयल की आवाजों वाला बचपन खोता जा रहा है, आधुनिक शहरों की भागदौड़ में पुरानी यादों की दुनिया धुंधली हो रही

2 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

डॉ पवन विजय

दीवालों पर शुभ अल्पनाएं, दरवाजे पर फूलों की लता, आंगन में हरसिंगार का पेड़, द्वार पर आम, अनार, नीम, नींबू के पेड़, घर के किनारे क्यारियों में रात रानी, सदाबहार, गुलाब, गेंदा, चंपा, मधुकामिनी, केतकी फूली हो। मटमैली दीवाल पर मौसम का असर दिख रहा हो। सुबह उठो तो फूल झरे हों, पात गिरे हों। आम की डालियों से लाल सूरज झांकता हो। उस पर बैठी कोयल बोल रही हो और गिलहरियां फुदक रही हों।

बारिश की खनखनाहट रोशनदान से पानी की नमी के साथ आती हो, वे तमाम गीत जो झींगुर ने जगनुओं को सुनाए थे। वे तमाम किस्से जिसे मेंढकों ने मछलियों को सुनाए थे सब के सब उसी रोशनदान से घर के बच्चे भी सुन रहे हों। उनकी भाषा को डिकोड करते समय कल्पनाओं के देश की खोज कर सकें जहां उन्हें तितलियां ले जाती हों, वही दूर देश जहां कोई परी रानी उन्हें बादलों के जहाज पर सैर कराया करती हो।

क्या वाकई अब धरती पर अब वे दिन नहीं रहे जहां बच्चे हंसकर उठा करते हों, उन्हें सुबह उनकी दादी प्यार करके जगाया करती हो, सुबह साढ़े छह बजे स्कूल बस का तीखा हॉर्न सुनकर मम्मियों के साथ भागते बच्चों को देखकर लगता तो है कि दुनिया बदल गई है, लेकिन मेरा मन उसी फूलों के दरवाजे वाले घर में अटका है जिसके अंदर किसी पायल की रुनझुन सावन की बूंदों के समांतर झनक रही है। आंगन में शायद झूला पढ़ा है, पेंग बढ़ाकर कोई बालिका आसमान छू रही है। कजरी की धुन दरवाजे के बाहर तक आ रही है। घर वैसे ही खत्म हो गए हैं, जैसे पूस का दिन खत्म हो जाता है। अब टू बीएचके वाली अंतहीन रात है जिसमें चांद नहीं दिखता, केवल मोटर और भीड़ का शोर है।

लेखक प्रोफेसर, समाजशास्त्री और साहित्यकार हैं।

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।