
नई दिल्ली : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी अब केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि गंभीर मरीजों के जीवन और मौत का सवाल बन गई है।
हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार आबिद रजा काजमी की समय पर वेंटिलेटर नहीं मिलने के कारण हुई मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया।
इसके बाद यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि आखिर पाकिस्तान के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में आईसीयू हमेशा भरे क्यों रहते हैं? क्या यह केवल वेंटिलेटर की कमी का मामला है, या इसके पीछे वर्षों से चली आ रही स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरियां, सीमित निवेश, प्रशिक्षित स्टाफ की कमी और बढ़ती आबादी का दबाव जिम्मेदार है? यह एक्सप्लेनर इन्हीं सवालों के जवाब तलाशता है।
पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद के दो सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीआईएमएस और पॉलीक्लिनिक में वेंटिलेटर लगभग हर समय उपयोग में रहते हैं। नए गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक उपकरण तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाते।
इस संकट की सबसे चर्चित घटना वरिष्ठ पत्रकार आबिद रजा काजमी की मौत रही। स्ट्रोक आने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत वेंटिलेटर पर रखने की सलाह दी, लेकिन पीआईएमएस के सभी 12 आईसीयू वेंटिलेटर पहले से व्यस्त थे।
परिवार ने निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी।

