पलामू: पलामू से सांसद रह चुके ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की खबर से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत बिहार की राजनीति से हुई थी। विधानसभा सदस्य से लेकर लोकसभा सांसद तक की भूमिका निभाने के बाद अब उनके नाम के साथ राज्यपाल पद जुड़ने की बात सामने आई है।

विधानसभा से लोकसभा तक रहा राजनीतिक सफर
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ब्रज मोहन राम 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद उन्होंने 1996 से 2004 तक पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहने के कारण पलामू क्षेत्र में उनकी पहचान एक अनुभवी राजनीतिक नेता के रूप में रही है।
छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल
बताई गई घोषणा के अनुसार, ओडिशा के अलावा पांच अन्य राज्यों में भी राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल किया गया है। ओम प्रकाश माथुर को केरल, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु, डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक, डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राज्यपाल का पद एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी है। पदभार ग्रहण करने के बाद राज्यपाल संबंधित राज्य में संविधान के प्रावधानों के तहत अपनी भूमिका निभाते हैं।
पलामू के राजनीतिक गलियारों में चर्चा
ब्रज मोहन राम का नाम ओडिशा के राज्यपाल पद से जुड़ने की खबर के बाद पलामू और आसपास के राजनीतिक क्षेत्रों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है। उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी इस खबर को लेकर उत्सुकता है। अब सभी की नजर आधिकारिक पुष्टि और पदभार ग्रहण करने की तारीख पर रहेगी।


