रांची: झारखंड में डॉक्टरों द्वारा प्रस्तावित राज्यव्यापी आंदोलन को टालने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ हुई वार्ता विफल हो गई है। वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद राज्य के चिकित्सा संगठनों ने अपने पूर्व निर्धारित आंदोलन को जारी रखने का कड़ा निर्णय लिया है।

इस निर्णय के तहत मंगलवार से प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर अपनी सेवाओं के दौरान बांह पर काला बिल्ला लगाकर मरीजों का इलाज करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। चिकित्सा संघों की गूगल मीट के माध्यम से आयोजित संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से रणनीति तय की गई, जिसके अनुसार 21 अक्टूबर को राज्य के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और 22 अक्टूबर से बेमियादी यानी अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत होगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रदेश सचिव डॉ. प्रदीप सिंह का कहना है कि जब तक सरकारी डॉक्टरों की जायज मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ये हैं प्रमुख मांगें
डॉक्टरों की मुख्य मांगों में डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डायनेमिक एसीपी) को लागू करना, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में आवश्यक संशोधन करना तथा डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट’ का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के बकाया भुगतान व दरों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की भी मांग की जा रही है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो 22 अक्टूबर से शुरू होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल से राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।


