बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने केंद्रीय कानून मंत्री को सौंपा एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल का ड्राफ्ट

पटना: देश के वकीलों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं पर अब जल्द ही रोक लगेगी।अब वकील के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करने के पहले लोगों को सोचना होगा।

देश के वकीलों की सुरक्षा के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया की सात सदस्यीय समिति द्वारा तैयार किया गया एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल का ड्राफ्ट केंद्रीय विधि मंत्री किरण रिजिजू को सौंप दिया गया है।

इस बात की जानकारी बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता मनन कुमार मिश्र ने गुरुवार को पटना में दी।

मिश्र ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की सात सदस्यीय समिति द्वारा तैयार किया गया एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल का ड्राफ्ट केंद्रीय विधि मंत्री किरण रिजिजू को सौंप दिया गया है।

केंद्रीय विधि मंत्री ने कहा कि वे इस बिल पर उचित कर्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को देंगे ताकि इसे कानूनी रूप दिया जा सके।

मनन मिश्र ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की सात सदस्यीय समिति ने देश भर के अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट संबंधी रूपरेखा व ड्राफ्ट बिल तैयार किया है।

समिति में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष वरीय अधिवक्ता एस प्रभाकरन, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता देवी प्रसाद ढल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह अध्यक्ष सुरेश चंद्र श्रीमाली,

बार काउंसिल ऑफ इंडिया और प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य शैलेन्द्र दुबे, राज बार काउंसिल कॉर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष प्रशांत कुमार सिंह, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट के कार्यकारिणी सह अध्यक्ष ए रामी रेड्डी व लीगल एड कमेटी के अध्यक्ष श्रीनाथ त्रिपाठी के नाम शामिल है।

प्रस्तावित बिल में अन्य बातों के अलावे यदि किसी भी अधिवक्ता या उसके परिवार के सदस्य को किसी भी प्रकार की क्षति या चोट पहुंचाने,

धमकी देने या उसके मुवक्किल द्वारा दिये गए किसी प्रकार की सूचना का खुलासा करने के लिए पुलिस या किसी पदाधिकारी के द्वारा अनुचित दबाव या किसी वकील को किसी मुकदमे की पैरवी करने से रोकने का दबाव या वकील की संपत्ति को किसी भी रूप में हानि पहुंचाने या किसी भी वकील के विरुद्ध अपशब्द या किसी प्रकार का आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है

तो इस प्रस्तावित कानून के तहत यह अपराध की श्रेणी में आएगा और ऐसे अपराधों के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा 6 माह से 2 वर्षों तक कि सजा तथा साथ में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इतना ही नहीं, अधिवक्ता को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा अलग से जुर्माना लगाया जा सकता है।

मिश्र ने कहा कि इस बिल को संसद से भी जल्द से जल्द पास कराने का प्रयास किया जाएगा। बिल में जरूरत पड़ने पर वकीलों को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का भी प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के खिलाफ किये गए उक्त अपराध गैर- जमानतीय व संज्ञय अपराध की श्रेणी में आएगा, जिनकी जांच पुलिस के उच्च अधिकारी द्वारा ही कि जा सकेगी।

किसी भी वकील के साथ किये गए अपराधों का अनुसंधान तीस दिनों के भीतर पूरा करना होगा और उक्त अपराध संबंधी मामले को जिला व सत्र न्यायाधीश या इनके समकक्ष न्यायालयों द्वारा ही देखा जाएगा।

ड्राफ्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि किसी अधिवक्ता के ही अभियुक्त होने की स्थिति में ये प्रावधान लागू नहीं होंगे।

अधिवक्ता या वकील संघ की किसी प्रकार की शिकायत के निपटारे के लिए जिला स्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक शिकायत निवारण समिति बनाने का भी प्रावधान इस बिल में बनाया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस बिल के ड्राफ्ट को सभी राज्य की बार कॉउन्सिल, सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संघों को भेजा गया था ताकि इसमें अगर कोई भी सुझाव किसी भी संगठन से वकीलों के हित में दिया जाता है तो उसे भी इसमें जोड़ दिया जाएगा।

अधिवक्ता संघों से मिले सुझाव को शामिल करते हुए अधिवक्ता प्रोटेक्शन बिल के ड्राफ्ट को विधि व न्याय मंत्री को दिया गया है।

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