Homeझारखंडमनरेगा में बड़े बदलाव की तैयारी, आउटसोर्सिंग व्यवस्था हो सकती है खत्म

मनरेगा में बड़े बदलाव की तैयारी, आउटसोर्सिंग व्यवस्था हो सकती है खत्म

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Preparations Underway for Major Changes in MNREGA: झारखंड में मनरेगा से जुड़ी काम की व्यवस्था में बड़े बदलाव होने की संभावना है। अब MNREGA में आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों से काम लेने का सिस्टम बंद किया जा सकता है।

साथ ही संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है — सरकार उन्हें 65 साल की उम्र तक नौकरी करने की अनुमति देने पर विचार कर रही है।

यह फैसला तीन दिसंबर को होने वाली झारखंड ग्रामीण रोजगार गारंटी (Jharkhand Rural Employment Guarantee) परिषद की बैठक में लिया जा सकता है। इस बैठक के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं, लेकिन इस बार इसकी अध्यक्षता ग्रामीण विकास मंत्री करेंगी।

बैठक में आउटसोर्सिंग खत्म करने पर विचार

बैठक में यह उम्मीद जताई जा रही है कि कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कई पदों पर आउटसोर्सिंग की व्यवस्था खत्म कर दी जाएगी।

अभी तक आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से कर्मचारियों को काम दिया जाता है, लेकिन प्रस्ताव है कि आगे से इन कर्मचारियों का मानदेय सीधे सरकार देगी। इसका मतलब है कि कंपनियों के माध्यम से भुगतान का जो सिस्टम चल रहा है, उसे बंद कर दिया जाएगा।

कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का प्रस्ताव

सरकार की योजना है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों को जो भुगतान किया जाता है और कंपनियां कर्मचारियों को जो राशि देती हैं, उस अंतर से कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कल्याणकारी योजनाएं शुरू की जाएँ। इससे मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों को आर्थिक रूप से ज्यादा फायदा मिल सकता है।

65 साल तक नौकरी करने का मौका

बैठक में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा जाएगा, जिसके अनुसार संविदा पर काम कर रहे मनरेगा कर्मचारियों को 65 साल की उम्र तक नौकरी में बने रहने की अनुमति दी जा सकती है।

अगर यह फैसला होता है, तो राज्य में 6000 से अधिक संविदा कर्मियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत होगी, क्योंकि अब उन्हें नौकरी से जल्दी हटने का डर नहीं रहेगा।

बर्खास्तगी मामलों की सुनवाई में बदलाव

बैठक में यह भी प्रस्ताव किया जा सकता है कि मनरेगा कर्मियों से जुड़ी बर्खास्तगी के मामलों की सुनवाई का अधिकार मनरेगा आयुक्त (Right MNREGA Commissioner) को दिया जाए। अभी यह अधिकार प्रमंडलीय आयुक्त के पास है, लेकिन बदलाव के बाद यह फैसला सीधे मनरेगा आयुक्त कर सकेंगे।

तीन दिसंबर की बैठक में लिए जाने वाले फैसलों से मनरेगा कर्मचारियों की कार्य व्यवस्था, नौकरी की सुरक्षा और आर्थिक सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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