प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ सुनने के लिए जमीन पर बैठे नितिन नवीन, लेकिन युवाओं और आदिवासियों की आवाज सुनने का साहस कब दिखाएगी भाजपा?

झारखंड कांग्रेस के राकेश सिन्हा ने नितिन नवीन पर निशाना साधते हुए युवाओं के रोजगार, आदिवासी अधिकारों और अंकिता भंडारी मामले में न्याय को लेकर सवाल उठाए।

Neeral Prakash
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रांची : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पर तंज कसते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रधानमंत्री की मन की बात सुनने के लिए जमीन पर बैठने का समय तो मिल जाता है, लेकिन देश के युवाओं, आदिवासियों और न्याय की गुहार लगा रहे परिवारों की आवाज सुनने के लिए उनके पास वक्त क्यों नहीं है?

राकेश सिन्हा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं को कैमरों के सामने जमीन पर बैठकर प्रधानमंत्री की बातें सुनने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जब देश का युवा रोजगार मांगता है, आदिवासी अपने अधिकारों की आवाज उठाता है और पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाता है, तब भाजपा के नेताओं के कानों में ताले क्यों लग जाते हैं? क्या भाजपा की राजनीति सिर्फ प्रधानमंत्री की प्रशंसा सुनने और दिखावटी तस्वीरें खिंचवाने तक सीमित रह गई है?

उन्होंने सवाल किया कि देश का युवा बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से परेशान है। उसके सवालों का जवाब कौन देगा? आदिवासी समाज अपने जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों को लेकर सवाल पूछता है, तो भाजपा के नेता उसकी आवाज सुनने से क्यों कतराते हैं? क्या युवाओं और आदिवासियों की पीड़ा भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व तक नहीं पहुंचती, या फिर जानबूझकर उनकी आवाज को अनसुना किया जाता है?

राकेश सिन्हा ने अंकिता भंडारी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाने की मांग पर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व कब गंभीरता दिखाएगा? क्या नितिन नवीन जी पीड़ित परिवार की आवाज सुनने के लिए भी जमीन पर बैठेंगे? क्या भाजपा का नेतृत्व न्याय की मांग कर रहे लोगों के बीच जाकर उनकी पीड़ा सुनेगा, या फिर प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद कैमरों के सामने अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगा?

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है, किसी नेता का मन नहीं। प्रधानमंत्री की बात सुनना किसी को बुरा नहीं लगता, लेकिन देश चलाने वालों की असली परीक्षा इस बात से होती है कि वे जनता के सवालों का जवाब देते हैं या नहीं। जनता को तस्वीरें नहीं, जवाब चाहिए; भाषण नहीं, रोजगार चाहिए; दिखावा नहीं, अधिकार चाहिए और आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए।

राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को यह समझना चाहिए कि जमीन पर बैठ जाने से कोई जननेता नहीं बन जाता, जननेता वह होता है जो जनता के दुख-दर्द को समझे, उसकी आवाज सुने और उसके सवालों का जवाब देने की हिम्मत रखे। प्रधानमंत्री के मन की बात सुनने के साथ-साथ देश के युवाओं के मन की बात, आदिवासियों की पीड़ा और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की पुकार सुनना भी भाजपा नेतृत्व की जिम्मेदारी है।

उन्होंने अंत में कहा कि भाजपा को कैमरों के सामने बैठने की राजनीति छोड़कर जनता के बीच खड़े होने की हिम्मत दिखानी चाहिए। देश का युवा, आदिवासी समाज और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवार अब केवल भाषणों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। वे भाजपा से सीधा सवाल पूछ रहे हैं—प्रधानमंत्री के मन की बात तो सुन ली, अब जनता के मन की बात कब सुनेंगे नितिन नवीन?

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नीरल प्रकाश के पास पत्रकारिता में 2 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में काम किया है। पिछले 2 सालों से वे IDTV इंद्रधनुष के साथ काम कर रही हैं, जहां उन्होंने ऑन-एयर प्रस्तुतिकरण के साथ-साथ बैकएंड कंटेंट क्रिएशन में भी योगदान दिया। समाचार रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने आकर्षक स्क्रिप्ट तैयार करने और कहानी को पेश करने का अनुभव भी प्राप्त किया है।