जैसे-जैसे कार आगे बढ़ रही है, लगता है रामगढ़, तुम्हारी सौंधी-सी खुशबू धीरे-धीरे पीछे छूट रही है

प्रदीप सौरभ ने रामगढ़ से विदाई के भावुक पलों को शब्दों में पिरोया। प्रकृति, पहाड़, हवाओं और लोगों की आत्मीयता से जुड़ी यादों का यह सफर दिल छू लेने वाला है।

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प्रदीप सौरभ

जैसे-जैसे कार आगे बढ़ रही है, लगता है रामगढ़, तुम्हारी सौंधी-सी खुशबू धीरे-धीरे पीछे छूट रही है। लेकिन तुम्हारे ये अनंत आकाश, मखमली बादल, सीना ताने खड़े पर्वत, गुनगुनाते झरने और देवदार-पाइन के घने दरख्त… इन सबको मैं अपनी रूह के किसी कोने में सहेजकर साथ ले जा रहा हूं। तुमने मुझे यहां सिर्फ ठहरने की जगह नहीं दी, बल्कि अपनी आग़ोश में ऐसे समेट लिया जैसे कोई मां अपने भटके हुए बच्चे को गोद ले लेती है। वही अपनों सा बेपनाह प्यार, वो धुंध में लिपटी हर एक सिहरती सुबह, दूर तक फैले लहराते खेत-खलिहान, गालों को सहलाती ठंडी हवाएँ और यहाँ के सादगी-पसंद लोगों की निश्छल आत्मीयता—सब कुछ मेरे वजूद का हिस्सा बन गया है। सच कहूँ तो इस फ़िरदौस जैसे गाँव को पीछे छोड़कर जाने का ख़याल ही दिल में एक अजीब सी कसक भर देता है, कदम जैसे वहीं ठहर जाना चाहते हैं। पर सफ़र ही तो ज़िंदगी है, और आगे बढ़ना इसकी मजबूरी। इसलिए एक बेहद भारी और भीगे हुए मन से तुमसे रुखसत ले रहा हूँ। शुक्रिया रामगढ़, मुझे इतनी हसीन यादों और बेहिसाब मोहब्बत से सराबोर करने के लिए। तुम्हारी ये आत्मीय मिठास और हवाओं का ये तरन्नुम मेरी आखिरी सांस तक मेरे साथ सांस लेगा।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।