साहित्य से प्रबंधन तक डॉ. मयंक मुरारी का सम्मान, मिला ‘सर्वोत्तम प्रबंधन गुरु’ अवॉर्ड

झारखंड के साहित्यकार और प्रबंधन गुरु डॉ. मयंक मुरारी को सृजनात्मक उपलब्धियों के लिए ‘सर्वोत्तम प्रबंधन गुरु सम्मान 2026’ मिला। रांची में डॉ. जेबी पाण्डेय ने सम्मान प्रदान किया।

4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची: झारखंड के साहित्यकार, लेखक और प्रबंधन गुरु डॉ. मयंक मुरारी को उनकी सृजनात्मक उपलब्धियों के लिए ‘सर्वोत्तम प्रबंधन गुरु सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया है। मानवाधिकार टुडे, पटना की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। अपरिहार्य कारणों से डॉ. मुरारी खुद सम्मान लेने पटना नहीं जा सके थे। उनकी ओर से रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ने सम्मान प्राप्त किया था। डॉ. मयंक मुरारी रांची के प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान उषा मार्टिन, रांची में सीएसआर पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित हैं। उनकी दर्जनों साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें पाठकों तथा साहित्य जगत से सराहना मिली है।

डॉ. मुरारी ने राजनीतिशास्त्र में एमए किया है। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण विकास, प्रबंधन, जनसंपर्क और पत्रकारिता का भी अध्ययन किया है। ‘विकास के वैकल्पिक माध्यम’ विषय पर उन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘मानववाद एवं राजव्यवस्था’, ‘राजनीति एवं प्रशासन’, ‘भारत एक सनातन राष्ट्र’, ‘माई: एक जीवनी’, ‘झारखंड के अनजाने खेल’, ‘झारखंड की लोक कथाएँ’, ‘लोक जीवन : पहचान, परम्परा और प्रतिमान’, ‘यात्रा बीच ठहरे कदम’, ‘ओ जीवन के शाश्वत साथी’, ‘पुरुषोत्तम की पदयात्रा’, ‘अच्छाई की खोज’, ‘भगवा ध्वज’, ‘जंबूद्वीपे भरतखंडे’, ‘दिव्य जीवन’, ‘सनातन उत्सव का देश’, ‘The Tribal Braveheart’ और ‘जीवन के अर्थ की खोज’ जैसी पुस्तकें शामिल हैं।

इसके अलावा भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक विषयों पर उनके शताधिक आलेख देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं। डॉ. मुरारी व्यक्तित्व विकास, प्रेरणा और संवाद के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन से जुड़े विषयों पर विभिन्न विद्यालयों और संस्थानों में नियमित रूप से व्याख्यान भी देते हैं।

कई प्रतिष्ठित सम्मानों से हो चुके हैं सम्मानित

डॉ. मयंक मुरारी को उनकी रचनात्मक उपलब्धियों के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें झारखंड विधानसभा का ‘सृजन सम्मान’, ‘तुलसी सम्मान’, ‘शब्द शिल्पी सम्मान’, ‘प्रभात खबर सम्मान’, ‘विद्या वाचस्पति’, ‘झारखंड गौरव सम्मान’, ‘सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान’, ‘झारखंड रत्न सम्मान’, ‘जयशंकर प्रसाद स्मृति सम्मान’ और ‘साहित्य अकादमी डॉ. रामदयाल मुंडा कथेतर सम्मान’ शामिल हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में भी उन्हें लायंस क्लब ऑफ रांची समेत कई संस्थाओं की ओर से पुरस्कार मिल चुके हैं।

रांची में डॉ. जेबी पाण्डेय ने किया सम्मानित

मानवाधिकार टुडे, पटना की ओर से प्रदान किए गए ‘सर्वोत्तम प्रबंधन गुरु सम्मान 2026’ के साथ डॉ. मयंक मुरारी को स्मृति चिह्न, पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र और सुंदरकांड की प्रति भी दी गई। रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ने डॉ. मयंक मुरारी को यह सम्मान प्रदान किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि यह भारत-भारती का सम्मान है और वे जीवन पर्यंत साहित्य एवं हिंदी की सेवा करते रहेंगे। सम्मान मिलने पर अनेक गणमान्य विद्वानों ने डॉ. मयंक मुरारी को बधाई और शुभकामनाएं दीं। डॉ. मुरारी ने सभी के प्रति आभार जताया। इस मौके पर प्रो. जेबी पाण्डेय ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा-

 “जीवन में पग-पग पर आप,

 करें कार्य नित मंगलकारी।

 और सफल हों, यश पावें,

 यही कामना सदा हमारी।”

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।