


रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा संचालन में हुई अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी के हाथ केस डायरी से कई अहम सुराग लगे हैं। सीआईडी की जांच के अनुसार, सह-आरोपी अमरेश कुमार सिंह के स्थान पर परीक्षा संचालन का काम संभाल रहे आरोपी धर्मेंद्र कुमार ने मुख्य सरगना संजीव लाल और अन्य लोगों के बीच तालमेल बैठाने के साथ-साथ पैसों का प्रबंध भी किया था। जांच में सामने आया है कि तत्कालीन चेयरमैन के निर्देश पर धर्मेंद्र ने टीडीपीएल कंपनी के माध्यम से परीक्षा संचालन के काम में सहयोग दिया।





परीक्षा संचालन में मदद और काम दिलवाने के एवज में धर्मेंद्र को टीडीपीएल की ओर से 1 प्रतिशत का कमीशन मिलता था, जिसकी कुल रकम लगभग 196 लाख रुपये थी। इसके अलावा, सीआईडी को आवासीय कार्यालय की अलमारी से आठ एडमिट कार्ड भी बरामद हुए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। बैंक खातों के मिलान से पता चला है कि धर्मेंद्र की पत्नी के खाते में बुलेट मोटरसाइकिल खरीदने के लिए 50 हजार रुपये की रकम भी हस्तांतरित की गई थी।
मामले में प्रवर्तन निदेशालय की भी एंट्री हो चुकी है, जिसने सीआईडी द्वारा दर्ज मामलों को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू कर दी है। इसके अतिरिक्त, झारखंड उच्च न्यायालय में सीआईडी ने काउंटर एफिडेविट (शपथ पत्र) दाखिल कर 14वीं जेपीएससी में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 1 करोड़ रुपये के रेट तय होने संबंधी दावों को खारिज कर दिया है। सीआईडी ने स्पष्ट किया कि 80 लाख रुपये दिए जाने के साक्ष्य मिले हैं, लेकिन 1 करोड़ रुपये के दावे में कोई ठोस सबूत नहीं है।
