रांची: राजधानी रांची में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और मरीज-हितैषी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। रांची के सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (CEA) के तहत एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। इसके तहत रांची जिले के सभी नर्सिंग होम, अस्पतालों और क्लीनिकों को अपने परिसरों में प्रमुखता से कुछ जानकारियां और दस्तावेज प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता की मांग पर लिया गया एक्शन
यह आदेश सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा द्वारा भेजे गए ईमेल के संदर्भ में और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।

इन 6 बातों का करना होगा पालन
सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी वैध और अपडेटेड लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रिसेप्शन या ऐसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित होना चाहिए जहां मरीजों और आम जनता की नजर आसानी से पहुंच सके। परामर्श शुल्क (कंसल्टेशन फीस), जांच शुल्क, प्रक्रिया शुल्क, बेड चार्ज और अन्य सेवाओं का आइटम-वाइज अपडेटेड रेट चार्ट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए। संस्थान में उपलब्ध डॉक्टरों के नाम, मेडिकल योग्यता, रजिस्ट्रेशन नंबर, स्पेशियलिटी और उनकी ड्यूटी/परामर्श का समय प्रदर्शित होना चाहिए। संस्थान में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं की पूरी जानकारी लगानी होगी।
मरीजों के अधिकार, शिकायत निवारण तंत्र (ग्रीवांस रिड्रेसल मेकैनिज्म) और अन्य जरूरी जानकारियां बोर्ड पर दर्शानी होंगी। चिकित्सा सेवाओं के लिए लिए जाने वाले शुल्कों में पारदर्शिता रखनी होगी और नियमों के विरुद्ध कोई भी छिपा हुआ या अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
7 दिनों की दी गई मोहलत
सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी इस आदेश के तहत सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को 7 दिनों के भीतर इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। तय समय सीमा के बाद निरीक्षण टीमों द्वारा औचक जांच की जाएगी और किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कानून के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


