
रांची : कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने पार्टी के अंदर चल रहे विवाद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अध्यक्ष की जिम्मेदारी संगठन को चलाने की होती है, जबकि प्रभारी कोच की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में गंभीर चूक हो रही है और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से नीतिगत मुद्दों पर राय तक नहीं ली जा रही है। उनके अनुसार, ऐसे हालात में अध्यक्ष को खुद निर्णय लेने चाहिए और “शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार नहीं किया जा सकता।”
डिलिमिटेशन कमिटी और नियुक्तियों पर सवाल
सुखदेव भगत ने डिलिमिटेशन कमिटी को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कमिटी में किसी आदिवासी नेता का शामिल न होना समझ से परे है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कई योग्य लोगों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मामलों की कमिटी की बैठक में वे हर मुद्दे पर जवाब मांगेंगे।
यूथ कांग्रेस और नियुक्तियों पर नाराजगी
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि यूथ कांग्रेस के उन नेताओं को जगह नहीं दी गई है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर काम किया है। इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पेड स्टाफ को पदाधिकारी बनाए जाने का फैसला समझ से बाहर है। सुखदेव भगत के इन बयानों के बाद पार्टी के अंदर चल रही हलचल एक बार फिर तेज हो गई है और संगठन की कार्यशैली पर बहस छिड़ गई है।

