रांची में 3 बच्चों के लापता होने से हड़कंप, परिजन रो-रोकर बेहाल, राजद नेता कैलाश यादव ने उठाए गंभीर सवाल

रांची के धुर्वा क्षेत्र में बच्चों के लापता होने का मामला गंभीर बना, कर्ण-अर्जुन और शिवा की तलाश जारी, कैलाश यादव ने इसे हॉटस्पॉट बताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

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रांची: धुर्वा शालीमार बाजार स्थित सुलभ शौचालय में कार्यरत डॉली देवी के दो जुड़वा बेटे कर्ण और अर्जुन तथा जगन्नाथपुर बस्ती के 14 वर्षीय शिवा के पिछले 14 दिनों से लापता होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसी सिलसिले में राजद प्रवक्ता और एचईसी नागरिक परिषद के अध्यक्ष कैलाश यादव ने आज पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उनके साथ स्थानीय पार्षद परमेश्वर सिंह और हटिया प्रखंड अध्यक्ष रविशंकर सिंह भी मौजूद रहे।

परिजनों का दर्द-बच्चे नहीं मिले तो कैसे जिएंगे

मुलाकात के दौरान कर्ण और अर्जुन के माता-पिता फूट-फूटकर रो पड़े। पूरे परिवार को नेताओं ने ढांढस बंधाया और बच्चों की स्थिति को लेकर जानकारी ली। डॉली देवी ने बताया कि प्रशासन की ओर से जानकारी मिली है कि एक बच्चे को पुरी में देखा गया था और अर्जुन से संपर्क भी हुआ है। वहीं अन्य बच्चों को भी देखने की बात सामने आई है, लेकिन वे फिर से कहीं चले गए।

इलाका बन रहा है हॉटस्पॉट–कैलाश यादव

कैलाश यादव ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि रांची समेत पूरे झारखंड में बच्चों का लापता होना चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि धुर्वा शालीमार मौसीबाड़ी और जगन्नाथपुर क्षेत्र अब बच्चों के लापता होने का “हॉटस्पॉट” बनता जा रहा है।

सीसीटीवी और पेट्रोलिंग की मांग

यादव ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और पुलिस को नियमित पैदल पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नशाखोरी और अवैध गतिविधियों के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जिन्हें रोकना जरूरी है।

72 घंटे का अल्टीमेटम

कैलाश यादव ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से बच्चों की तलाश में लगा हुआ है। लेकिन अगर 72 घंटे के भीतर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिलता, तो उग्र आंदोलन की तैयारी की जाएगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।