बंजर में लहलहाए आम के बाग, किसानों की आय 3 लाख पार

बिरसा हरित ग्राम योजना ने लातेहार महुआडांड़ पुटरूंगी गांव में बंजर जमीन को आम के बागों में बदलकर किसानों की आय बढ़ाई और ग्रामीण समृद्धि का मॉडल प्रस्तुत किया है

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बिरसा हरित ग्राम योजना बनी सेतु, प्रशासन और किसानों के समन्वय से महुआडांड़ ने लिखी समृद्धि की नई इबारत

महुआडांड़ (लातेहार) : महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों के सक्रिय सहयोग और मार्गदर्शन से चम्पा पंचायत के पुटरूंगी गांव के किसानों ने बंजर धरती पर हरियाली की क्रांति ला दी है। मनरेगा के तहत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना को धरातल पर उतारकर किसानों ने पथरीली जमीन को लहलहाते आम के बागानों में बदल दिया है। आज यही बाग किसानों के लिए सालाना 2 से 3 लाख रुपए तक की शुद्ध आय का जरिया बन चुके हैं।

प्रशासन बना सारथी, किसानों ने दिखाई मेहनत

पुटरूंगी के प्रगतिशील किसान सुधीर कुजूर, नवीन कमार, रोशन कुजूर, पुनीत टोप्पो, सुचित टोप्पो, सुमित एक्का, प्रकाश टोप्पो और मुकेश टोप्पो ने बताया कि वर्ष 2017-18 से पहले उनकी लगभग 20 एकड़ भूमि पूरी तरह अनुपयोगी और पथरीली थी। महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों के सहयोग से उन्हें बिरसा हरित ग्राम योजना की जानकारी मिली और तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। प्रखंड के अधिकारियों ने समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर पौधरोपण, सिंचाई और जैविक खाद के उपयोग की सही विधि बताई।

अफसर-किसान समन्वय लाया रंग

प्रखंड विकास पदाधिकारी और मनरेगा टीम के निरंतर फॉलोअप का नतीजा रहा कि किसानों ने कई वर्षों तक पौधों की नियमित देखभाल की। कड़ी सुरक्षा और वैज्ञानिक विधि से बागवानी का असर अब दिख रहा है। कभी सूखी दिखने वाली जमीन आज दशहरी, लंगड़ा, आम्रपाली, मल्लिका और सिंदूरी जैसी प्रीमियम किस्मों के आमों से लदी हुई है।

खेत तक पहुंच रहा बाजार

अधिकारियों के सहयोग से किसानों को बाजार लिंकेज की भी जानकारी दी गई। नतीजा यह है कि आज आम की गुणवत्ता देखकर बड़े थोक व्यापारी खुद पुटरूंगी गांव के बागानों तक पहुंच रहे हैं। किसानों का परिवहन खर्च बच रहा है और बिचौलियों के बिना खेत पर ही उपज का वाजिब दाम मिल रहा है।

प्रेरणा बना पुटरूंगी मॉडल

प्रखंड के अधिकारियों का कहना है कि पुटरूंगी के किसानों की सफलता ‘प्रशासन-किसान समन्वय’ का बेहतरीन उदाहरण है। इस मॉडल को देखकर अब आसपास की पंचायतों के किसान भी बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं। किसान सुधीर कुजूर कहते हैं, “पिछले साल आंधी-ओलावृष्टि से नुकसान हुआ था, लेकिन प्रखंड कार्यालय से मिले हौसले और इस साल के अच्छे मौसम ने सारी भरपाई कर दी।” महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों के सहयोग से पुटरूंगी ने साबित कर दिया कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो और किसान मेहनती, तो बंजर भी बाग बन सकता है और गरीबी समृद्धि में बदल सकती है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।