वित्तीय अनियमितता के आरोप में किए गए थे निलंबित, अब संभाल रहे राजधानी की कमान

वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित रहे डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को रांची का सिविल सर्जन बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय जांच और नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज।

Razi Ahmad
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रांची: रांची का सिविल सर्जन डॉ अमरेंद्र प्रसाद को बनाया गया है। सोमवार को उन्होंने पदभार भी ग्रहण कर लिया है। लेकिन इन सब के बीच स्वास्थ्य विभाग का एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें उन्हें वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।

इतना ही नहीं उनके खिलाफ विभागीय जांच भी कराने का आदेश दिया गया था। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि जिस अधिकारी को वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित कर दिया गया था उसे राजधानी के सिविल सर्जन की कमान कैसे सौंप दी गई है। क्या विभाग ने उन्हें क्लीन चिट दी थी। इसके बाद उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जानें क्या था पूरा मामला

झारखण्ड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई की थी।

विभाग ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अनगड़ा के तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और सदर अस्पताल रामगढ़ के उपाधीक्षक डॉ. अमरेन्द्र प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। यह कार्रवाई सुनील कुमार महतो केतारी बगान रांची के नाम पर चलंत चिकित्सा वाहन (मोबाइल मेडिकल यूनिट) के फर्जी भुगतान से जुड़ी शिकायत के बाद हुई थी।

इतना ही नहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति (जिसकी अध्यक्षता डॉ. आर. एन. शर्मा, उप निदेशक ने की थी) की रिपोर्ट में डॉ. अमरेन्द्र प्रसाद को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया था।

जांच रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2019 से 31 दिसंबर 2021 की अवधि के दौरान वेलफेयर सोसाइटी ऑफ झारखण्ड द्वारा संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट (वाहन संख्या JH01AG-9602) के चिकित्सा कार्यों के नाम पर राशि का फर्जी आहरण और गबन किया गया था।

इस मामले में डॉ. अमरेंद्र प्रसाद की संलिप्तता सामने आने के बाद ‘झारखण्ड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2016’ के नियम-9(1)(क) के तहत यह कार्रवाई की गई है।

निलंबन की अवधि के दौरान डॉ. अमरेन्द्र प्रसाद का मुख्यालय क्षेत्रीय उप निदेशक दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल रांची का कार्यालय तय किया गया था। नियमावली के नियम-10 के तहत उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का निर्देश दिया गया था।

साथ ही उनके विरुद्ध अलग से विभागीय जांच शुरू की गई थी। यह आदेश झारखण्ड के राज्यपाल के निर्देशानुसार और विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद 24 अप्रैल 2024 को संयुक्त सचिव विद्यानन्द शर्मा पंकज के हस्ताक्षर से जारी किया गया था।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।