
- कलस्टरिंग ऑफ कॉलेजेस के खिलाफ डोरंडा कॉलेज के छात्रों ने किया सड़क जाम
AISA Protest: डोरंडा कॉलेज के छात्रों ने कलस्टरिंग ऑफ कॉलेजेस सहित उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के संकल्प के अन्य बिंदुओं के खिलाफ आइसा और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
छात्रों का कहना है कि संकल्प का उद्देश्य शिक्षा को कॉर्पोरेट मॉडल पर ढालना, सीटों में कटौती करना और विषयों-संकायों को अलग कर छात्रों को बहुविषयक शिक्षा से वंचित करना है।
प्रदर्शन में आइसा राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने कहा कि क्लस्टर प्रणाली को फंडिंग से जोड़कर राज्य के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। इससे छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को अपने मूल परिसर से हटकर अन्य जगह जाना पड़ेगा, जहाँ सुविधाओं की कमी और आर्थिक बोझ बढ़ेगा। कई छात्रों को नजदीकी कॉलेज में सीट न मिलने पर पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी।
आइसा रांची जिला अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि संकल्प में नामांकन रोकने, कॉलेजों का दायरा सीमित करने तथा शिक्षकों-कर्मचारियों के स्थायी पदों में भारी कटौती की योजना शामिल है। विषयों को अलग-अलग संकायों में बाँटे जाने से छात्रों को निजी संस्थानों की ओर धकेला जाएगा, जहाँ भारी फीस वसूली होती है।
आइसा जिला सचिव संजना मेहता ने कहा कि 4 वर्षीय स्नातक कोर्स की मल्टीपल एंट्री–एग्जिट व्यवस्था वास्तविकता में छात्रों को लाभ नहीं दे रही। शोध निदेशकों की कमी से योग्य छात्र शोध में प्रवेश नहीं पा रहे, जबकि रेगुलर कोर्स खत्म कर सेल्फ-फाइनेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डोरंडा कॉलेज प्रभारी सोनाली केवट ने चेताया कि संकल्प लागू होते ही शिक्षा संकाय पूरी तरह महँगा हो जाएगा और कई क्षेत्रीय भाषाएँ व सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विषय बंद होने की कगार पर हैं, जबकि विश्वविद्यालय पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।
आइसा एक्टिविस्ट शुभ ने कहा कि यह एक Cluster System सहित अन्य बिंदुओं पर संकल्प के खिलाफ प्रदर्शन एक शुरुआती कदम है। इसके खिलाफ छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच जागरूकता अभियान, हस्ताक्षर अभियान महाविद्यालय-विश्वविद्यालय और जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
यदि इससे मांग पूरी नहीं होती है, तो झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों को एकजुट करते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, विधानसभा मार्च के साथ राजभवन घेराव करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

