
1 लाख की आबादी को होती है गोंदा डैम से पानी की सप्लाई
रांची नगर निगम भी टैंकरों में भरकर बांट रहा सरफेस वाटर
रांची: कांके क्षेत्र के लाखों लोगों तक पहुंचने वाला पेयजल साफ नहीं है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि पानी को देखकर आप खुद इसका अंदाजा लगा सकते हैं। गोंदा डैम स्थित वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट में पानी शुद्ध करने की प्रक्रिया से जुड़े कई मोटर खराब पड़े हैं, जिससे वैज्ञानिक तरीके से वाटर ट्रीटमेंट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में भले ही पानी का ट्रीटमेंट किया जा रहा है, लेकिन गंदा पानी ही लोगों के घरों में सप्लाई हो रहा है। जिससे कि लोगों को साफ पानी पिलाने के विभाग के सभी दावे खोखले साबित हो रहे है। अब सवाल ये उठता है कि क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।
लोक भवन और सीएम आवास भी जुड़े है पाइपलाइन से
गोंदा डैम से वीआईपी लाइन कनेक्ट है। लोक भवन से लेकर सीएम आवास में भी गोंदा डैम से पानी की सप्लाई की जाती है। वहीं अधिकारी और नेताओं के घरों में भी वहीं से पानी जाता है। ऐसे में माननीयों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है। वहीं अन्य लोग भी गंदे पानी के कारण इंफेक्शन की चपेट में आ सकते है।
खराब पड़े है केमिकल मिक्स करने वाले मोटर
जानकारी के अनुसार प्लांट में चूना और क्लोरीन को नियंत्रित मात्रा में पानी में मिलाने वाले मोटर लंबे समय से खराब हैं। इसके कारण चूना और क्लोरीन को सीधे पानी में मिलाया जा रहा है। कभी लिक्विड क्लोरीन का फ्लो कम कर दिया जाता है तो कभी हाइ। वहीं चूना भी डायरेक्ट डाला जा रहा है। ऐसे में पानी में केमिकल की मात्रा बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता।
5 नालों का पानी गिर रहा डैम में
बताया जा रहा है कि कांके डैम का पानी पहले से ही नालियों का पानी मिलने के कारण प्रदूषित हो चुका है। शहर के 5 बड़े नालों का पानी सीधे डैम में गिर रहा है। ऐसे में फिल्ट्रेशन प्लांट की शुद्धिकरण प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं हो पा रहा है। केवल क्लोरीन और चूना मिलाकर पानी की आपूर्ति की जा रही है। बता दें कि गोंदा फिल्ट्रेशन प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 4 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) पानी शुद्ध करने की है और वहीं से 1 लाख की आबादी को पानी की आपूर्ति की जा रही है।
1954 में बना था प्लांट
वर्ष 1954 में स्थापित इस प्लांट में वर्तमान में दर्जनों कर्मचारी काम कर रहे है। प्लांट में लैब में एक्सपर्ट कार्यरत हैं। वह समय समय पर पानी की क्वालिटी चेक करने की बात करते है। लेकिन पानी को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं वाटर ट्रीटमेंट के नाम पर आईवाश तो नहीं किया जा रहा। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही खराब मोटरों की मरम्मत और वाटर व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में संबंधित विभाग जल्द कार्रवाई करे।
इंदौर में गंदे पानी से हुई थी कई लोगों की मौत
जनवरी 2026 में इंदौर में गंदे पानी की सप्लाई के कारण डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हो गई थी। वहीं सैकड़ों लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ऐसे में सप्लाई पानी को डायरेक्ट पीने से बचने की जरूरत है। चूंकि डैम के पानी को ही टैंकर में भरकर किल्लत वाले इलाकों में भी सप्लाई की जा रही है। रांची नगर निगम टैंकरों की मदद से लोगों को पानी दे रहा है। ऐसे में लोगों को खुद से सतर्क रहने की जरूरत है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के गोंदा अवर प्रमंडल के सहायक अभियंता शुभम उपाध्याय ने बताया कि सप्लाई से पहले कई चरणों में पानी को ट्रीट किया जाता है। हर दिन पानी को टेस्ट किया जाता है। हर दस दिन में हमलोग सैंपल डिस्ट्रिक्ट लैब और महीने में स्टेट लैब भेजते है। रॉ वाटर की क्वालिटी बहुत खराब है। जबतक नाले बंद नहीं होंगे तो पानी को ट्रीटमेंट में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।

