मां का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है उनका स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा : संजय सर्राफ

मातृ दिवस मां के त्याग, प्रेम और समर्पण को सम्मान देने का अवसर है। हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाने वाला यह दिन मातृत्व की महिमा को समर्पित है।

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रांची : हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, ममता, करुणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप होती है। संसार में मां का स्थान सर्वोच्च माना गया है। मां अपने बच्चों के जीवन को संवारने, संस्कार देने और हर परिस्थिति में उनका साथ निभाने का कार्य करती है। इसी मातृत्व, त्याग और असीम प्रेम के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष मातृ दिवस अर्थात मदर्स डे मनाया जाता है।मातृ दिवस प्रत्येक वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस 10 मई को मनाया जाएगा। यह दिन दुनिया भर में माताओं के सम्मान, उनके योगदान और परिवार एवं समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्मरण करने के लिए समर्पित होता है।मातृ दिवस मनाने की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। इसकी शुरुआत का श्रेय अमेरिकी महिला एना जार्विस को दिया जाता है।

उन्होंने अपनी मां की स्मृति में माताओं के सम्मान हेतु विशेष दिवस मनाने का अभियान चलाया था। उनके प्रयासों से वर्ष 1914 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को आधिकारिक रूप से मातृ दिवस घोषित किया।इसके बाद धीरे-धीरे यह दिवस विश्व के अनेक देशों में मनाया जाने लगा।मातृ दिवस का मुख्य उद्देश्य माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करना है। मां अपने बच्चों केपालन-पोषण में अपना पूरा जीवन समर्पित कर देती है। वह परिवार की आधारशिला होती है, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चों के सुख-दुख में सदैव साथ खड़ी रहती है। यह दिवस हमें मां के त्याग, संघर्ष और प्रेम को समझने तथा उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।

इस दिन लोग अपनी माताओं को उपहार देकर, शुभकामनाएं भेजकर,उनके साथ समय बिताकर तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्मान प्रकट करते हैं। विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं एवं विभिन्न संगठनों द्वारा भी माताओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर मातृ शक्ति को सम्मानित कर समाज में उनके योगदान को सराहा जाता है।भारतीय संस्कृति में मां को देवी के समान माना गया है। हमारे धर्मग्रंथों में भी “मातृ देवो भवः” का संदेश दिया गया है, जिसका अर्थ है -मां को देवता के समान सम्मान देना। मां ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जो उसे जीवन के नैतिक मूल्यों और संस्कारों की शिक्षा देती है।इसलिए मातृ दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मां के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।आज के आधुनिक एवं व्यस्त जीवन में परिवारों के बीच बढ़ती दूरियों के कारण यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मां का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि जीवन के हर दिन किया जाना चाहिए। मां का प्रेम अनमोल होता है,जिसकी तुलना संसार की किसी भी वस्तु से नहीं की जा सकती,निस्संदेह, मातृ दिवस हमें मां के त्याग और ममता को स्मरण कर उनके प्रति आदर, सेवा और प्रेम व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। मां का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और उनका स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।