रांची: रांची में सफाई व्यवस्था और कचरा उठाव को लेकर नगर निगम की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। शहर की साफ-सफाई दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी पर हर महीने 6 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद मोहल्लों में व्यवस्था बेपटरी हो गई है। कई इलाकों में कचरा वाहन नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं और गाड़ियां पहुंचने पर भी उनका जिंगल नहीं बजता है, जिससे लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि कचरा वाहन कब आया और कब निकल गया। इसके कारण लोग घरों का कचरा सड़कों पर फेंकने को मजबूर हैं, जिससे गंदगी और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। अब पार्षदों ने भी सफाई एजेंसी के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि सफाई के नाम पर पैसे बहाए जा रहे हैं, लेकिन उसका परिणाम नहीं दिख रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरा उठाने के लिए 350 से अधिक वाहन और 350 से ज्यादा चालक तैनात होने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। गाड़ियों में जीपीएस और कैमरा लगे होने के बावजूद वाहन तय रूट या समय पर नहीं चलते हैं। वाहन चालकों की मनमानी के कारण नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और नगर निगम द्वारा इस लचर व्यवस्था पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से आम जनता में रोष व्याप्त है।


