मां के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे जावेद अंसारी
जावेद अंसारी के मुताबिक, वह अपनी मां शरीफून खातून का इलाज कराने के लिए बरियातू स्थित आलम हॉस्पिटल पहुंचे थे। अस्पताल में भर्ती कराने से पहले उन्होंने प्रबंधन से आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज की सुविधा उपलब्ध होने के बारे में जानकारी ली थी। परिजनों का दावा है कि कार्ड से इलाज होने का भरोसा मिलने के बाद ही उन्होंने मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया।

ऑपरेशन के लिए मांगे 1.20 लाख रुपये
परिजनों का आरोप है कि मरीज को भर्ती करने के बाद जब ऑपरेशन की बात आई, तो अस्पताल की ओर से 1 लाख 20 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। जावेद अंसारी ने आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज करने की मांग की, लेकिन उनके अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने इस योजना के तहत इलाज करने से इनकार कर दिया।
परिजनों का कहना है कि भर्ती से पहले दिए गए आश्वासन और बाद में रखी गई शर्तों के बीच अंतर होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
आर्थिक तंगी के कारण नहीं हो सका ऑपरेशन
जावेद अंसारी के परिवार के अनुसार, उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था करना संभव नहीं था। इसके कारण शरीफून खातून का ऑपरेशन नहीं हो सका। बाद में मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज करा दिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद परिवार के सामने मरीज के आगे के इलाज की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है।


