रांची : राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स ) में एमबीबीएस की सीटें 180 से बढ़ाकर 250 कर दी गई हैं। इससे अधिक विद्यार्थियों को मेडिकल की पढ़ाई करने का अवसर मिला है। हालांकि, सीटों में बढ़ोतरी के साथ संस्थान की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वर्ष 2026 में दाखिला लेने वाले एक मेडिकल छात्र ने कॉलेज की प्रयोगशालाओं में जगह और उपकरणों की कमी के साथ-साथ हॉस्टल में पीने के साफ पानी की समस्या भी उठाई है। छात्र के अनुसार, संस्थान में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है।

पीने के पानी के लिए रोज खर्च करने पड़ रहे 30 रुपये
छात्र ने हॉस्टल में पीने के साफ पानी की उपलब्धता पर सवाल उठाते हुए बताया कि पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को बाहर से पानी खरीदकर पीना पड़ता है। इसके लिए उन्हें प्रतिदिन या एक दिन छोड़कर लगभग 30 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है। छात्र ने हॉस्टल के बाथरूम की स्थिति पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई जगहों पर नल टूटे हुए हैं और पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं होती। इससे विद्यार्थियों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। छात्रों के अनुसार, हॉस्टल में साफ पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सीटें बढ़ीं, लेकिन लैब और उपकरणों की कमी बरकरार
छात्र ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशालाओं में 200 से 250 विद्यार्थियों के अनुरूप पर्याप्त जगह नहीं है। इसके अलावा, जरूरी उपकरणों की कमी भी महसूस की जा रही है। मेडिकल की पढ़ाई में प्रैक्टिकल का विशेष महत्व होता है। ऐसे में प्रयोगशालाओं में जगह कम होने और आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। छात्रों का कहना है कि एमबीबीएस की सीटें बढ़ाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इसके साथ कॉलेज की प्रयोगशालाओं, उपकरणों, हॉस्टल और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी विस्तार होना चाहिए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे अपनी पढ़ाई और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें।
काली पट्टी लगाकर विरोध में शामिल हुए मेडिकल छात्र
इधर, बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए ) के झारखंड संयुक्त चिकित्सा आंदोलन के तहत रिम्स में सैकड़ों चिकित्सक जुटे। इस दौरान मेडिकल छात्र भी काली पट्टी लगाकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने अपनी मांगों तथा समस्याओं को लेकर आवाज उठाई। चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल ने रिम्स निदेशक कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर मांगों पर उचित कार्रवाई करने की अपील की। चिकित्सा संगठनों की प्रमुख मांगों में झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करना, चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना और मेडिकल छात्रों की समस्याओं का समाधान करना शामिल है।
21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन, 22 से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
चिकित्सा संगठनों ने 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो 22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जा सकता है।रिम्स में एमबीबीएस की सीटें बढ़ने से राज्य के अधिक विद्यार्थियों को डॉक्टर बनने का अवसर मिल रहा है। हालांकि, छात्रों की ओर से उठाई गई समस्याओं ने संस्थान की बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान आकर्षित किया है। अब सवाल यह है कि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप प्रयोगशालाओं, उपकरणों, हॉस्टल, स्वच्छता और पीने के साफ पानी की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।सीटों में बढ़ोतरी के साथ सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है, ताकि रिम्स में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुरक्षित आवासीय व्यवस्था मिल सके।


