शारीरिक चुनौतियों को मात देकर पैरा एशियाई खेलों में पदक जीतना चमारिया का लक्ष्य

हादसे में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद सचिन चमारिया ने हार नहीं मानी। अब बोकिया में भारत के लिए पैरा एशियाई खेलों का पदक जीतना उनका सपना है।

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नई दिल्ली: कभी ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले सचिन चमारिया अब शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए पैरा एशियाई खेलों में बोकिया में देश के लिए पदक जीतने के सपने को पूरा करना चाहते हैं। वर्ष 2008 में एक दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद उनका खेल करियर बदल गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले चमारिया ने ताइक्वांडो छोड़कर क्लब थ्रो जैसे खेल में हाथ आजमाने के बाद बोकिया (बीसी3 वर्ग) को चुना। बोकिया दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विकसित सटीक निशाने और रणनीति पर आधारित खेल है। यह पैरालंपिक खेलों का हिस्सा है। इसमें खिलाड़ी रंगीन गेंदों को ‘लक्ष्य गेंद’ के जितना संभव हो सके करीब पहुंचाने की कोशिश करते हैं। बीसी3 वर्ग में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी रैंप का इस्तेमाल कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सहायक उनकी मदद करता है, लेकिन शॉट की दिशा और रणनीति का फैसला खिलाड़ी स्वयं करता है।

सचिन वर्ष 2021 में बोकिया से जुड़े थे। वह इसके कई राष्ट्रीय खिताब जीत चुके हैं। उन्होंने हाल ही में काहिरा में आयोजित 2026 विश्व बोकिया चैलेंजर में एकल वर्ग में कांस्य और युगल वर्ग में रजत पदक जीता था। पैरा एशियाई खेलों का उद्घाटन रविवार (18 अक्टूबर) को होना है, लेकिन चमारिया की स्पर्धा शनिवार से ही शुरू हो गई। उन्होंने पूल चरण के अपने पहले मुकाबले में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के खलीफ अहमद को 8-4 से हराया। चमारिया ने जापान के नागोया से ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘मेरा ध्यान हर मुकाबले में अपनी क्षमता के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर है। इस स्तर पर सफलता के लिए अच्छी तैयारी, सही रणनीति और सटीक निशाना बेहद जरूरी है।’’ उन्हें अपने अगले दो मुकाबले सोमवार को जापान के ताकाहाशी काजुकी और कोरिया के होवोन जेओंग के खिलाफ खेलने हैं। इस स्पर्धा का फाइनल 21 अक्टूबर को होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए पैरा एशियाई खेलों में पदक जीतना बड़ी उपलब्धि होगी। इससे देश में इस खेल के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी और जागरूकता आएगी।’’ चमारिया ने बताया कि पैरा एशियाई खेलों में उनकी भागीदारी की पुष्टि प्रतियोगिता शुरू होने से कुछ समय पहले ही हुई थी, इसके बावजूद उनकी तैयारियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी टीम ने प्रशिक्षण, उपकरण, यात्रा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर पहले से ध्यान दिया हुआ था।’’ चमारिया चाहते हैं कि इस खेल को पहचान मिलने के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और आगे बढ़ने के अधिक अवसर भी मिलें।

उन्होंने कहा, ‘‘बोकिया के विकास के लिए प्रशिक्षित कोच, नियमित प्रतियोगिताएं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अवसर और विश्वस्तरीय उपकरण उपलब्ध कराना जरूरी है। बीसी3 वर्ग के खिलाड़ियों के लिए रैंप, प्रतियोगिताओं में इस्तेमाल होने वाली गेंदें, जरूरत के अनुसार तैयार किए गए उपकरण और प्रशिक्षित खेल सहायक अहम भूमिका निभाते हैं।’’ चमारिया ने दिव्यांग युवाओं से अपनी रुचि के अनुसार खेल चुनने और उसमें आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिभा हर जगह मौजूद है। हम सब मिलकर ऐसी परिस्थितियां बना सकते हैं, जिनमें प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिले।’’

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।