
रांची: सहारा समूह में जमा अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में निवेशकों ने रविवार को राजधानी रांची में सत्याग्रह कर रहे है। विश्व भारती जनसेवा संस्थान के बैनर तले लोक भवन के पास आयोजित धरने में सहारा पीड़ितों ने सरकार से वर्षों से अटकी राशि जल्द वापस कराने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों के अनुसार झारखंड में सहारा की अलग-अलग योजनाओं में करीब 32,600 करोड़ रुपये निवेशकों के फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि कई योजनाएं मैच्योर हो जाने के बावजूद उन्हें पूरी जमा राशि वापस नहीं मिल पाई है। निवेशकों ने आरोप लगाया कि दस्तावेज या तकनीकी कमियों के कारण कई दावे अटक गए या खारिज हो गए हैं। ऐसे मामलों की दोबारा जांच कर कमियों को दूर करने और सरल प्रक्रिया के जरिए भुगतान करने की मांग की गई।
निवेशकों ने सहारा की संपत्तियों और निवेशकों की रकम से जुड़े लेनदेन की भी जांच कराने की मांग सरकार से की। उनका कहना है कि जमा राशि जीवनभर की मेहनत की बचत थी। पैसा नहीं मिलने के कारण कई परिवार इलाज, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्चों के लिए आर्थिक संकट झेल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में आर्थिक परेशानी और राशि फंसने के कारण अब तक 74 निवेशकों की मौत हो चुकी है। उन्होंने मृत निवेशकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी उठाई। हालांकि, इन मौतों के दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
97 हजार करोड़ से अधिक के दावे
निवेशकों के अनुसार, देशभर में सहारा समूह से राशि वापस पाने के लिए 97 हजार करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए हैं। केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय के तहत निवेशकों की राशि लौटाने के लिए पोर्टल शुरू किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 29 मार्च 2023 के आदेश के बाद केंद्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज को 5,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे, जिसके बाद पात्र निवेशकों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई।

