
विवेकानंद सिंह कुशवाहा
बिहार में सम्राट सरकार ने सदन के पटल पर आज ध्वनिमत से बहुमत हासिल कर लिया। यह जरूर है कि नीतीश चाचा सीएम थे तो बिहारवासी निश्चिंत थे, लेकिन अब सम्राट भैया सीएम हैं, तो समृद्ध बिहार की राह संभव है।
सदन में नेता विपक्षी दल तेजस्वी भाई द्वारा इलेक्टेड और सेलेक्टेड सीएम का जाप पुनः जपा गया। तेजस्वी यादव जी, सम्राट चौधरी जी यदि पर्ची वाले सीएम होते तो आपका यह जाप कुछ देर ठहरता भी, लेकिन डे वन से यह तय था कि नीतीश चाचा के बाद NDA से अभी यदि कोई बिहार का मुख्यमंत्री हो सकता है, तो वह ‘सम्राट चौधरी’ हैं।
जाहिर है कि सम्राट जी को इस भूमिका के लिए भाजपा नेतृत्व ने ही तैयार किया था, लेकिन सम्राट जी की अपनी मेहनत और काबिलियत के बिना यह संभव नहीं हो पाता। चाचाश्री नीतीश कुमार का दिल जीतने में भी सम्राट जी कामयाब रहे। तेजस्वी जी आप भी मुझे संभावनाशील नेता लगते हैं। नीतीश चाचा को भी लगे होंगे, तभी तो एक बार उन्होंने आपके नाम को भी आगे किया था, लेकिन मेहनत के मामले में आप सम्राट जी से बहुत पीछे हैं। आप चुनाव के समय जितने एक्टिव होते हैं, काश पूरे पांच साल जमीनी रूप से एक्टिव रह पाते, तो बात ही कुछ और होती।
मैं अक्सर लोगों से कहता हूं कि सम्राट जी के मीडिया बाइट देख कर उनके बारे में कोई राय मत बनाइये। एक मुलाकात में वह आदमी आपके दिल में थोड़ी जगह बना लेगा, भले ही आप उनके आलोचक रहे हों। सम्राट जी आज सदन में अच्छा बोले। तीनों C (क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म) पर किसी तरह का समझौता न करने की बात करके सम्राट जी ने तय कर दिया कि सरकार न्याय के साथ ही विकास के रास्ते पर चलेगी।
सच में जिस सरलता के साथ सत्ता का हस्तांतरण बिहार में हुआ, वह राजनीति के इतिहास में दर्ज होगा। कुछेक वर्चस्वशाली लोगों को जरूर थोड़ी पीड़ा हुई है। उनमें से कुछ तो बीते कुछ वर्षों से बिहार में चल रहे प्रशासनिक गिद्धभोज के लाभार्थी हैं। उनको उस भोज से अब वंचित होने का भय सता रहा है। कुछ पढ़े-लिखे लोगों को पीड़ा हुई है कि उनके राज्य का सीएम कम पढ़ा-लिखा है। भले सम्राट जी बहुत पढ़े-लिखे न हों, पर नया सीखने के मामले में उनका जोड़ नहीं है। उनमें राज्य के कुछ बेहतर करने की ललक है।
सम्राट जी ने अपने अग्रेशिव रुख से भी यह स्पष्ट कर दिया कि क्यों वह नीतीश जी और भाजपा नेतृत्व की पसंद हैं। जैसे को तैसा जवाब देने के मामले में सम्राट जी का जोड़ नहीं है।
आशा नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि सम्राट जी के नेतृत्व में चीजें बेहतर होंगी। बिहार में सकारात्मक बदलाव आयेगा। एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार को दिन-रात काम करना होगा। हालांकि, सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य बिहार से पलायन सिर्फ कुछेक इंडस्ट्री लगने से नहीं रुकेगा। कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में भी सरकार को निरंतर प्रयास करना होगा। लाभकारी कृषि ही एकमात्र सेक्टर है, जो बिहारियों को बिहार में रोक कर रख सकता है।

