
नवेंदु उन्मेष
देश में आपातकाल लगाये जाने की गुरुवार को पचासवीं वर्षगांठ है। वर्ष 1975 में आज ही के दिन आकाशवाणी से घोषणा हुई कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया है। उस दिन रांची की सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ था। जिधर देखो पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी। लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि आपातकाल क्या होता है और रांची की सड़कों पर अचानक पुलिस क्यों नजर आ रही है जबकि रांची में कोई अनहोनी घटना नहीं हुई थी। तब मैं रांची जिला स्कूल का छात्र था और समय पर स्कूल पहुंचा तो देखा फिरायालाल चौक से लेकर शहीद चौक तक को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। इससे पूर्व प्रतिदिन यह इलाका आंदोलनकारी छात्रों से भरा रहता था। जुलूस और नारों की आवाज सुनाई पड़ती थी। उस दिन ऐसा कुछ भी नहीं था। इसके कुछ दिनों पूर्व आंदोलनकारियों ने मेन रोड पर स्थित प्रधान डाकघर और सेंट्रल बैक की शाखा को आग के हवाले कर दिया था। तब रांची विश्वविद्यालय का प्रवेश द्वार मेन रोड पर प्रधान डाकघर के ठीक सामने हुआ करता था। छात्र विश्वविद्यालय से निकलते और आंदोलन करना शुरू कर देते थे। छात्र आंदोलन के दौरान फिरायालाल चौक पर गोलियां भी चली थी।
उस दिन दोपहर के वक्त जिला स्कूल के पीछे स्थित रांची टाइम्स अखबार के दफ्तर में पहुंचा तो देखा रांची के पत्रकारों की बैठक चल रही है। पत्रकार डीपी दासगुप्ता कह रहे थे डीसी कौन होता है हमारा समाचार चेक करने वाला। मैं समाचार चेक कराने नहीं जाऊंगा भले मुझे जेल क्यों न जाना पडे। उस बैठक में शारदा रंजन पांडे, दिलीप दाराद, विशेश्वर चटर्जी, एसपी सिन्हा, विजय श्रीवास्तव आदि पत्रकार मौजूद थे।
स्कूल से लौटने के बाद मैं प्रतिदिन रातू रोड के बिरला मैदान में आरएसएस की शाखा लगाता था। शाखा लगाया ही था कि अचानक कुछ पुलिस वाले आ गये और आरएसएस के ध्वज को अपने साथ लेते गए और चेतावनी दी कि कल से यहां शाखा नहीं लगनी चाहिए। मेरी समझ में नहीं आया कि आखिर मैं प्रतिदिन यहां शाखा लगता हूं तब तो कोई पुलिस वाला यहां नहीं आता आखिर आज ही यह क्यों आ गया। बाद में पता चला कि आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है। आपातकाल काल के वक्त आकाशवाणी रांची से प्रसारित होता था – जगह नहीं है जगह नहीं है इतने सारे बच्चों के साथ किसी दूसरे बस का इंतजार करें। अनुशासन ही देश को महान बनाता है। देश में अनुशासन पर्व चल रहा है। काम ज्यादा बातें कम।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

