
अरुण कुमार
सम्राट चौधरी के मुकाबले नीतीश कुमार को इकोसिस्टम का सहारा अधिक मिला। लालू जी के विरोध का पूरा इकोसिस्टम अपने आप बिना एक पैसा खर्च के नीतीश जी के पीछे आकर खड़ा हो गया था। इस कारण नीतीश जी ने जो भी किया उसे इस इकोसिस्टम ने सही साबित करने के लिए जान लगा दी। नीतीश जी को सुशासन और विकास का ब्रांड एम्बेसडर साबित होने में बहुत अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ी। पूरा जदयू और पूरा बीजेपी उनके पीछे खड़ा रहा। बिहार में जो भी होता उसका पूरा श्रेय नीतीश कुमार को देने वालों में होड़ लग जाती थी। सभी बड़े नेता ‘माननीय मुख्यमंत्री’, ‘माननीय मुख्यमंत्री कहते नहीं थकते थे। लेकिन सम्राट चौधरी के पक्ष में वह इकोसिस्टम खड़ा नहीं है। जदयू वाले सम्राट चौधरी को कोई श्रेय नहीं दे रहे। बीजेपी वाले भी कंजूसी कर रहे हैं। सम्राट चौधरी के महत्वाकांक्षी ‘इनकाउंटर मॉडल’ के खिलाफ उनके मंत्री ही बोल रहे हैं। उनके कैबिनेट का कोई भी सदस्य किसी भी बात के लिए अपने मुख्यमंत्री को श्रेय देता नहीं दिख रहा है। सम्राट चौधरी के लिए यह संक्रमण काल है। इस स्थिति से ठीक से निपट लिए तो लंबे समय तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
लेखक पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

