


रांची : झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू (54 वर्ष) का शनिवार देर रात अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देनेवालों का तांता लग गया है। यही नहीं, उनके निधन की खबर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा को बड़ा आघात पहुंचा है। सुदिव्य कुमार सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में माना जाता था। सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर वे लगातार अपनी बात जनता के सामने मजबूती से रखते थे।
सुदिव्य कुमार सोनू के पास सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी। पार्टी में भी वे लगातार सक्रिय रहे। यही वजह थी कि झामुमो संगठन और सरकार दोनों में उनकी अलग पहचान बनी थी। उनके अचानक निधन की खबर से राज्यभर में शोक का माहौल है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
सुदिव्य कुमार सोनू ने सिर्फ गिरिडीह के विधायक और राज्य के मंत्री के रूप में ही अपनी पहचान नहीं बनाई, बल्कि करीब तीन दशक तक झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ रहकर पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में जगह बनाई। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में की थी। वर्ष 1989 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता ली थी।
राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे। शुरुआती चुनावों में हार के बावजूद उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे। वर्ष 2019 में उन्हें पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से जीत मिली। इसके बाद 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
2024 में लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग के साथ पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी।
सुदिव्य कुमार सोनू, शंभूनाथ विश्वकर्मा के पुत्र थे। उनके अचानक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटे समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं। इस कठिन समय में उनके बड़े भाई भी परिवार के साथ खड़े हैं।
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उन्हें गिरिडीह विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वे छठे स्थान पर रहे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में झामुमो ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। इस बार उनका मुकाबला तत्कालीन विधायक और भाजपा प्रत्याशी निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ। सुदिव्य यह चुनाव जीत नहीं सके, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार किया और छठे स्थान से सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गए।
2019 में पहली बार बने गिरिडीह के विधायक
लगातार दो चुनावों के अनुभव के बाद झामुमो ने 2019 में फिर सुदिव्य कुमार सोनू को गिरिडीह से मैदान में उतारा। इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ। इस बार सुदिव्य कुमार सोनू ने जीत हासिल की और पहली बार विधानसभा पहुंचे।
इसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें गिरिडीह सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने एक बार फिर जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार विधायक बने। उन्होंने उस सीट पर भाजपा को लगातार दूसरी बार हराया, जिसे भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता था। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली।





