


आनंद कुमार
इसे एक त्रासद इत्तेफ़ाक ही कहा जा सकता है कि 2019 में हेमंत सोरेन सरकार के सत्ता में आने के बाद चौथे मंत्री का पद पर रहते निधन हुआ। हेमंत सोरेन के पहले कार्यकाल (2019-24) में दो मंत्री और इस कार्यकाल के दूसरे वर्ष के पूरा होने के पहले दो मंत्री इस दुनिया से विदा ले चुके हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहे हाजी साहब (73).बुजुर्गवार थे। कोरोना से पीड़ित हुए, ठीक हुए और फिर हार्ट अटैक से चल बसे। उनकी जगह उनके बेटे हफीजुल हसन मंत्री बने फिर मधुपुर से उपचुनाव जीता।2024 में भी हफीजुल जीते और अभी भी मंत्री हैं।





स्कूली शिक्षा और उत्पाद मंत्री जगरनाथ महतो (56) को भी कोरोना ने लीला। फेफड़े संक्रमित हुए। लंबा इलाज चला पर बच नहीं पाए। 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके स्थान पर उनकी पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाकर डुमरी से उपचुनाव लड़ाया गया। वे जीतीं लेकिन 2024 का चुनाव वे जयराम महतो से हार गईं।
स्कूली शिक्षा, साक्षरता एवं निबंधन मंत्री रामदास सोरेन (62) भी किडनी के प्रत्यारोपण के बाद ज्यादा दिन जीवित नहीं रह सके। 2 अगस्त 2025 को घर के बाथरूम में गिरने के बाद दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद उनके बेटे सोमेश सोरेन को जेएमएम ने घाटशिला उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया और वे रिकॉर्ड वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे।
गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू (56) इन सबकी तुलना में सबसे फिट और युवा थे। 2019 और 2024 का चुनाव जीतनेवाले सोनू मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार के सबसे सक्रिय और ताकतवर मंत्री जाने और माने जाते थे।
उन्हें उनकी बेबाक और मुखर कार्यशैली के लिए जाना जाता था। विधानसभा के अंदर और बाहर, वे विपक्षी दलों को तार्किक रूप से जवाब देने में माहिर थे। गिरिडीह के स्थानीय विकास कार्यों में भी वे व्यक्तिगत रूप से रुचि लेते थे, जिसके कारण आम जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और पैठ काफी गहरी थी।
हाल ही में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलनों के दौरान सरकार की तरफ से मध्यस्थता करने और छात्रों से बातचीत का मोर्चा संभालने में उनकी मुख्य भूमिका रही थी। शनिवार को वे शिक्षक दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय थे। देर रात गिरिडीह स्थित उनके आवास पर अचानक उनके सीने में दर्द हुआ और तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तुरंत गिरिडीह के स्थानीय मर्सी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सुदिव्य सोनू का अचानक निधन होना एक बड़ा झटका है।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और उनके परिजनों को इस भीषण आघात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
