रांची: सुप्रीम कोर्ट ने जेएसएससी (JSSC) द्वारा जारी सहायक आचार्य संयुक्त परीक्षा के संशोधित रिजल्ट को गलत ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया है। अदालत ने स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के निर्देश पर निकाले गए इस रिजल्ट पर सख्त रुख अपनाते हुए आयोग को अगले चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से फ्रेश रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया है। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के बाद अब राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में नियुक्त हो चुके लगभग 1500 सहायक आचार्यों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। यह फैसला जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एएस चंद्रचूड़ की पीठ ने झारखंड के मुख्य सचिव को अदालत में अनुपालन रिपोर्ट (कॉम्प्लायंस रिपोर्ट) दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनाया।

पूरा मामला जेएसएससी द्वारा निकाली गई 26,004 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें लगभग 11,300 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। दरअसल, अगस्त 2025 में परीक्षा का पहला रिजल्ट जारी किया गया था, लेकिन इसके बाद शिक्षा विभाग के निर्देश पर पूरे परिणाम को संशोधित किया गया। इस पहले संशोधन के कारण पूर्व में सफल रहे लगभग 1122 अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए थे, जबकि 384 नए अभ्यर्थियों को जगह मिली थी। इस बदलाव का मुख्य कारण यह था कि जेटेट (JTET) की आरक्षित श्रेणी से न्यूनतम अंक लाकर पास होने वाले अभ्यर्थियों को, नियुक्ति परीक्षा में अनारक्षित वर्ग के बराबर या उससे अधिक अंक मिलने के बावजूद अनारक्षित श्रेणी में शामिल नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अभ्यर्थी जेटेट में आरक्षित अंकों के साथ उत्तीर्ण है, लेकिन मुख्य नियुक्ति परीक्षा में उसके प्राप्तांक अनारक्षित वर्ग के क्वालीफाइंग मार्क्स (60% या उससे अधिक) के बराबर हैं, तो उसे अनारक्षित पद पर चयनित किया जाएगा। आयोग द्वारा अब फिर से नया फ्रेश रिजल्ट तैयार किए जाने से कट-ऑफ और चयनित अभ्यर्थियों की सूची में व्यापक बदलाव तय माना जा रहा है।



