नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सवाल किया कि राजमार्गों पर खड़े वाहनों का तुरंत पता लगा लेने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पास इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली क्यों नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने नवंबर 2025 में राजस्थान के फालोदी इलाके में हुए एक सड़क हादसे से जुड़े स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी।

मामले में न्याय मित्र के रूप में शीर्ष अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नाडकर्णी ने हाल में हुए कुछ सड़क हादसों का जिक्र किया, जो राजमार्गों पर वाहनों को खड़ा किए जाने के कारण हुए थे। पीठ ने कहा, “एनएचएआई, जिसके पास सभी संसाधन मौजूद हैं, कोई ऐसी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली क्यों नहीं तैनात कर सकती, जिससे राजमार्गों पर खड़ी की गई किसी भी गाड़ी का तुरंत पता लगाया जा सके?” मामले में पेश एक अधिवक्ता ने कहा कि एनएचएआई के पास राजमार्गों पर गश्त की व्यवस्था है। पीठ को बताया गया कि इस मामले में कई अंतरिम आवेदन दायर किए गए हैं। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर के लिए तय की। उसने कहा कि वह राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने से जुड़ी याचिकाओं पर भी विचार करेगी। सितंबर में मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राजमार्गों पर अतिक्रमण और वाहन खड़े किए जाने का मुद्दा उठाया था।


