रांची: झारखंड के लालपनिया स्थित तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन पर कोयले का भीषण संकट गहरा गया है, जिससे बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप होने की नौबत आ गई है। संयंत्र से प्रतिदिन 320 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है, लेकिन वर्तमान में केवल अगले 5 दिनों के लिए ही कोयले का स्टॉक शेष बचा हुआ है। निर्बाध बिजली उत्पादन जारी रखने के लिए किसी भी थर्मल पावर प्लांट में कम से कम 20 दिनों का कोयला स्टॉक होना अनिवार्य होता है। स्थिति यह है कि प्लांट को प्रतिदिन उत्पादन के लिए दो रैक यानी लगभग 6000 टन कोयले की आवश्यकता होती है, परंतु सीसीएल से प्रतिदिन दो रैक के स्थान पर केवल एक ही रैक कोयला मिल पा रहा है। यहां तक कि सितंबर महीने में कुछ दिन ऐसे भी रहे जब एक रैक भी कोयला नहीं पहुंचा, जिसके कारण बचा हुआ स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है।

तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड (टीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और सीसीएल को इस संकट की जानकारी दे दी है तथा तत्काल कोयले की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है। पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश के कारण खदानों में पानी भर जाने से सीसीएल और बीसीसीएल में कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसका असर बिजली संयंत्रों पर दिख रहा है। केवल तेनुघाट ही नहीं, बल्कि देश भर के 148 थर्मल पावर प्लांटों में से 45 संयंत्रों में महज एक से चार दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है। इस गंभीर संकट को देखते हुए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और कोल इंडिया ने सहायक कंपनियों को बिजली संयंत्रों में कोयला आपूर्ति तेज करने के कड़े निर्देश दिए हैं।


