नयी दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने शुक्रवार को पार्टी के संगठनात्मक विवाद पर निर्वाचन आयोग की सुनवाई के समय पर सवाल उठाए और इस कदम को ‘‘पूरी तरह से कपटपूर्ण’’ करार दिया। यह सुनवाई 12 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान होनी है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने भी कहा कि ‘‘ममता बनर्जी, तृणमूल की संस्थापक अध्यक्ष, ही तृणमूल हैं।’’
गोखले ने बताया, ‘‘यह सुनवाई शनिवार को होने वाली है, और पहली बार ऐसा हो रहा है कि यह मुख्य कार्यालय में नहीं हो रही है, जब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन चल रहा है। क्या यह महज एक संयोग है? सुनवाई का समय पूरी तरह से संदिग्ध लगता है। लेकिन निर्वाचन आयोग एक उच्च संवैधानिक संस्था है, इसलिए हम सुनवाई में शामिल होंगे।’’
उन्होंने कहा कि इस मामले को सिर्फ दो विधायी समूहों के आपसी दावों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
गोखले ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने गद्दारों को भी बुलाया है। ये वे धोखेबाज हैं जिन्होंने निर्वाचन आयोग से मिले किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया, सिवाय इसके कि वे निर्वाचन आयोग की समय-सीमा बढ़ाने की गुहार लगाते रहे। उनकी दलीलों में कोई दम नहीं है। उन्होंने बस नयी तारीखें मांगी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दसवीं अनुसूची बिल्कुल स्पष्ट है। संसदीय या विधायी पार्टी और मूल राजनीतिक पार्टी के बीच बड़ा अंतर है।’’
गोखले ने कहा, ‘‘संविधान ने अपने विवेक से चार रेफरी तय किए हैं – पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष, निर्वाचन आयोग और उच्चतम न्यायालय। हमें संविधान पर भरोसा है।’’
आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण, नाम, संपत्ति और चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों को लेकर 12 सितंबर को नयी दिल्ली में अलग-अलग बैठकों के लिए उनके प्रतिनिधियों को बुलाया है।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह को पूर्वाह्न 11 बजे मिलने का समय दिया गया है, जबकि ममता बनर्जी गुट एक घंटे बाद द्वारका में ‘इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट’ में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मिलेगा।
विधानसभा उपचुनावों के कार्यक्रम की घोषणा होने के बाद, यह सुनवाई काफी मायने रखती है, क्योंकि दोनों गुटों ने कहा है कि वे अपने-अपने उम्मीदवार उतारेंगे।

