Brajesh Ganjhu Encounter : झारखंड में आतंक का पर्याय बन चुके नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। टीपीसी (TPC) संगठन का कुख्यात कमांडर और 30 लाख का इनामी नक्सली ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह उत्तर प्रदेश एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया है। इस कार्रवाई के साथ ही राज्य में माओवादियों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है।
वाराणसी में रविवार तड़के हुई एक मुठभेड़ में यूपी एटीएस ने कुख्यात नक्सली ब्रजेश गंझू को ढेर कर दिया। मारे गए नक्सली पर झारखंड सरकार की तरफ से 25 लाख और एनआईए की तरफ से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।


इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी असीम मंडल दस्ते के दो बड़े इनामी नक्सलियों—5 लाख के इनामी समीर महतो और उसकी पत्नी 2 लाख की इनामी मालती मुर्मू को गिरफ्तार कर लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के कारण झारखंड अब नक्सलवाद के खात्मे की कगार पर पहुंच गया है। इस साल झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा और झारखंड जगुआर के साझा अभियानों में बड़े-बड़े नाम जैसे असीम मंडल, अनमोल, अमित मुंडा और सहदेव महतो सहित 120 से अधिक कैडर सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं। वहीं, 50 से ज्यादा नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा बलों ने अब तक 111 हथियार और लगभग 10,000 कारतूस बरामद किए हैं।
कभी सारंडा और बूढ़ा पहाड़ के जंगलों में नक्सलियों का एकछत्र राज हुआ करता था, लेकिन पुलिस की नई रणनीतियों, फॉरवर्ड पिकेट्स और तकनीकी इंटेलिजेंस के चलते आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। झारखंड पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, बूढ़ा पहाड़, सारंडा, पारसनाथ, लुगु पहाड़ और झुमरा समेत राज्य के 10 प्रमुख नक्सल प्रभावित इलाके अब पूरी तरह से माओवादियों के आतंक से मुक्त हो चुके हैं।


