जनता जबतक समझदार नहीं बनेगी तबतक यह तुष्टिकरण का खेल चलता रहेगा: सुदेश महतो

News Aroma Media
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रांची: आजसू पार्टी की केंद्रीय सभा की बैठक शुक्रवार को देवघर के मधुपुर स्थित बुढ़ई में हुई। केंद्रीय सभा की बैठक में मुख्य रुप से तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई।

जिसमें पार्टी के पूरे वर्ष की कार्य योजना पर चर्चा एवं नीतिगत निर्णय, राज्य सरकार के एक वर्ष के कामकाज का विस्तृत मूल्यांकन और बंगाल चुनाव तथा मधुपुर उप-चुनाव पर विशेष चर्चा हुई।

बैठक में उपस्थित आजसू पार्टी के अध्यक्ष सह राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने कहा कि झारखण्ड स्वाभाविक राज्य नहीं है।

यह संघर्ष से उपजा हुआ राज्य है और इसकी तुलना किसी अन्य राज्य से करना उचित नहीं है।

यह केंद्रीय सभा आने वाले चार सालों तक के लिए पार्टी के भावी कार्यक्रमों एवं योजनाओं पर मंथन व चिंतन करने को लेकर है। यह सभा झारखंड एवं झारखंडियत के संरक्षण को लेकर है।

उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों एवं हमारे वीर शहीदों के सपनों का राज्य जबतक नहीं बनेगा, हम संघर्ष करते रहेंगे। तुष्टिकरण को लेकर देवघर से मंत्री दिया गया।

हाजी हुसैन साहब को मंत्री तो बनाया गया लेकिन उनका दायरा सीमित रखा गया।

यह तुष्टिकरण नहीं तो और क्या है। जनता जबतक समझदार नहीं बनेगी तबतक यह तुष्टिकरण का खेल चलता रहेगा।

राज्य की खनिज संपदाओं का हो रहा दोहन

झारखंड प्राकृतिक सम्पदाओं से भरा-पूरा प्रदेश है। जिन खनिज सम्पदाओं और जल, जंगल, ज़मीन के संरक्षण के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन का बलिदान देकर अंग्रेजों से दो-दो हाथ किया, जिसके संरक्षण के लिए हमारे आंदोलनकारियों ने बाहरी लोगों से लड़ाई की, आज हमारे अपने लोग ही इन खनिज संपदाओं की तस्करी में लगे हैं।

अबुआ दिशुम, अबुआ राज के सपनों के साथ ये खिलवाड़ कोई बाहरी नहीं बल्कि अपने ही कर रहें।

यह चिंतनीय विषय है। झारखंड के पास खनिज सम्पदाओं का भंडार है और अगर इसका सही उपयोग किया जाए तो गऱीबी, भूखमरी, बेरोज़गारी आदि समस्याओं का खात्मा संभव है।

पंचायत चुनाव न कराना सरकार की सबसे बड़ी विफलता

पंचायत चुनाव कराने में सरकार विफल रही। गांव की सरकार अफसरों के जिम्मे कर दी गई।

पारा शिक्षकों की नियुक्ति नियमावली नहीं बनी। अनुबंध और मानदेय पर काम करने वाले लाखों झारखंडी युवा अपने हाल पर पड़े रहे।

अलबत्ता आंदोलन करते युवाओं को लाठी और दमन का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों के पैसे फ़ाइलों से बाहर नहीं निकल पाए

चुनाव से पहले किसानों की कर्जमाफी का वादा किया गया था। किसानों पर सात हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज हैं।

इस साल दो हजार करोड़ माफ करने की तैयारी है लेकिन अब तक फाइलों से पैसे नहीं निकले।

जीएसटी कंपनसेशन के नाम पर सरकार केंद्र सरकार से टकराव लेते रहे।

जबकि दूसरे राज्यों ने केंद्र की सलाह पर कर्ज लेकर विकास की गति को जारी रखा।

राज्य सरकार अपनी आमदनी के स्रोत को मजबूत करने के लिए सिस्टम डेवलप करने में नाकाम रही।

राज्य सरकार ने 86 हजार 370 करोड़ का बजट पास किया, लेकिन पैसे खर्च हों, योजनाएं गति पकड़े इसके लिए जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकी।

बैठक में लिए गए कई सांगठनिक प्रस्ताव। बैठक में पार्टी के निचले ईकाई से लेकर केंद्रीय समिति तक पुनर्गठन करने एवं नए लोगों को दायित्व देने का निर्णय लिया गया।

22 जून तक एक लाख सक्रिय सदस्य तथा 10 लाख साधारण सदस्य प्रदेश में  बनाने का निर्णय लिया गया।

22 जून तक सभी जिला, प्रखंड, पंचायत एवं सभी अनुषंगी ईकाई का सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया।

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