अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर इस्लामाबाद में होने की संभावना: रिपोर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी वार्ता का अगला दौर इस्लामाबाद में होने की संभावना जताई जा रही है। वार्ता में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दे शामिल हैं।

Razi Ahmad
4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

US Iran Talks : अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की तकनीकी वार्ता के आयोजन स्थल के रूप में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद प्रमुख विकल्प बनकर उभरी है। मीडिया की एक रिपोर्ट में रविवार को यह जानकारी दी गई।

अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के उद्देश्य से 18 जून को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में 21 जून को स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता हुई थी।

समाचार पत्र ‘डॉन’ ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया कि वार्ता फिर शुरू करना कूटनीतिक प्रक्रिया को पटरी पर बनाए रखने और अमेरिका एवं ईरान के बीच लंबे समय से जारी विवादों को सुलझाने के प्रयासों का हिस्सा है।

एक राजनयिक सूत्र ने कहा, ‘‘तकनीकी वार्ता के लिए दो संभावित स्थान हैं-इस्लामाबाद और स्विट्जरलैंड का बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट। हालांकि, इस्लामाबाद में वार्ता होने की संभावना अधिक है।’’

तकनीकी वार्ता 11 जुलाई को होने की संभावना है, लेकिन इसके स्थल को लेकर अंतिम फैसले के बारे में अभी घोषणा नहीं की गई है।

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिन तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों के कारण वार्ता अस्थायी रूप से टाल दी गई है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों के पूरा होने के बाद तेहरान के प्रतिनिधिमंडल की संरचना की घोषणा की जाएगी।

पिछले तीन दशकों से ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई तेहरान पर बड़े पैमाने पर किए गए अमेरिका एवं इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों के पहले दिन 28 फरवरी को मारे गए थे।

अली खामेनेई को बृहस्पतिवार को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

‘डॉन’ ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया कि वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में ‘फ्रीज’ की गईं ईरानी संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

ग्यारह जुलाई की बैठक का उद्देश्य दो सप्ताह पहले हस्ताक्षरित ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के तहत निर्धारित रूपरेखा को आगे बढ़ाना है। इस समझौता ज्ञापन में दोनों पक्षों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे संबंधित मुद्दों पर व्यापक समझौता करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।
इससे पहले इस सप्ताह की शुरुआत में अप्रत्यक्ष तकनीकी वार्ता हुई थी।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस वार्ता को ‘‘बहुत अच्छी’’ बताया था। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि दोनों पक्ष विदेशों में ‘फ्रीज’ अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों में से कुछ राशि जारी करने को लेकर सहमति पर पहुंच गए हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात से कथित तौर पर इनकार किया कि ऐसा कोई समझौता हुआ है।

राजनयिक सूत्रों ने कहा कि वार्ता में आए ठहराव के दौरान भी कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थ अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क बनाए रखने में मदद करते रहे। इस दौरान हुई बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने और जून में स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद तय 60 दिन के युद्धविराम को कायम रखने पर ध्यान दिया गया।

सबसे हालिया उच्चस्तरीय वार्ता स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में हुई थी, जिसमें कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थता की थी। वार्ताकारों के अनुसार, उस बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, समुद्री सुरक्षा बढ़ाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने से जुड़े व्यापक समझौते तक पहुंचने के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई थी।

राजनयिक सूत्रों ने बताया कि लंबे समय तक चले वार्ता सत्रों में परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदियों, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और लेबनान में युद्धविराम पर चर्चा की गई।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।