
Latehar News: लातेहार झारखंड के वर्ल्ड फेमस हिल स्टेशन नेतरहाट से महज 8 किलोमीटर दूर बसे नैना गांव में हालात ‘वाटर इमरजेंसी’ जैसे हो गए हैं। 18 मई को गांव का एकमात्र सरकारी कुआं धंसने के बाद 300 की आबादी पिछले 10 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रही है।
हैरान करने वाली बात यह है कि जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड तक के अधिकारियों को मामले की पूरी जानकारी होने के बावजूद आज तक गांव में न तो पानी का एक टैंकर पहुंचा है और न ही बोरिंग के लिए एक गड्ढा खोदा गया है।
10 दिन से ‘सिस्टम फेल’, नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर लोग
कुआं ध्वस्त होने के बाद 60 परिवारों के सामने पीने के पानी का घोर संकट खड़ा हो गया है। गर्मी में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे सुबह 4 बजे से 2 किलोमीटर दूर नदी से पानी लाने को मजबूर हैं।
फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
गांव के उमेश महतो ने कहा, “10 दिन हो गए कुआं धंसे हुए।
आश्वासन बहुत हुआ, अब चाहिए सिर्फ पानी”
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गांव की मनीता देवी का सब्र जवाब दे गया। उन्होंने कहा, “अधिकारी आते हैं, कुआं देखते हैं, फोटो खिंचाते हैं और ‘हो जाएगा’ बोलकर चले जाते हैं।
क्या कहते है पीएचडी विभाग के अधिकारी
इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, लातेहार के कार्यपालक अभियंता दीपक कुमार महतो ने बताया, “मामला हमारे संज्ञान में है।स्थायी समाधान के लिए बोरिंग का एस्टीमेट भी तैयार कराया जा रहा है।
पर्यटन नगरी के नीचे प्यास से तड़पता गांव
गौरतलब है कि नैना गांव को ‘झारखंड का कश्मीर’ कहे जाने वाले नेतरहाट का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। सरकार नेतरहाट को इंटरनेशनल टूरिज्म मैप पर लाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन उसी नेतरहाट की तलहटी में बसा यह आदिवासी बहुल गांव 10 दिन से पानी की एक-एक बूंद के लिए तड़प रहा है। सरकार के ‘हर घर जल’ के दावे की पोल खोलती यह तस्वीर है।

