नयी दिल्ली : केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने मंगलवार को कहा कि जल सुरक्षा के लिए केंद्र, राज्यों, स्थानीय निकायों, समुदायों और उद्योगों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने भारत में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी, नवाचार और जनभागीदारी की जरूरत पर जोर दिया। यहां 12वें सीआईआई जल नवाचार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा कि ‘वाटर विजन 2047’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप एक रणनीतिक पहल है जिसका उद्देश्य मजबूत, समावेशी और सभी के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि जल राज्य का विषय है इसलिए केंद्र, राज्यों, स्थानीय निकायों, समुदायों और उद्योग के बीच सहयोग जरूरी है।’’ चौधरी ने कहा कि भारत में जल प्रबंधन की रणनीति पांच स्तंभों-राजनीतिक इच्छाशक्ति, सार्वजनिक वित्त पोषण, साझेदारी, जनभागीदारी और स्थिरता के लिए जनजागरूकता-पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत नदी बेसिन आधारित योजना की ओर बढ़ रहा है, जिसे डिजिटल जल विज्ञान निगरानी का समर्थन प्राप्त है। इसका उद्देश्य ‘अविरल धारा’ और ‘निर्मल धारा’ यानी नदियों में निरंतर और स्वच्छ प्रवाह सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि ‘वाटर विजन 2047’ का एक प्रमुख लक्ष्य चक्रीय जल अर्थव्यवस्था तैयार करना है जिसके तहत शोधित अपशिष्ट जल के औद्योगिक इस्तेमाल, ताप विद्युत संयंत्रों और शहरी हरित क्षेत्रों में उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सिंचाई में अधिक दक्षता की जरूरत पर जोर देते हुए चौधरी ने कहा कि ‘कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट’ कार्यक्रम का आधुनिकीकरण अधिक कुशल तरीके से जल पहुंचाने की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत भूमिगत पाइप नेटवर्क के जरिये सीधे खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) सेंसर और एससीएडीए जैसी डिजिटल प्रौद्योगिकियां समान, सुनिश्चित और कुशल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद कर सकती हैं। मंत्री ने किसानों को ‘‘हर बूंद से अधिक फसल’’ हासिल करने और अधिक मूल्य वाली फसलों की ओर रुख करने में मदद करने के लिए सूक्ष्म सिंचाई के महत्व पर भी जोर दिया।
चौधरी ने कहा कि ‘जन भागीदारी’ भारत की जल रणनीति के केंद्र में है। अटल भूजल योजना, जल शक्ति अभियान, मिशन अमृत सरोवर और जल संचय जन भागीदारी जैसी पहल जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ सरकारी कोशिशों से भारत के पानी के भविष्य को सुरक्षित नहीं किया जा सकता। इसके लिए लोगों की भागीदारी और जन-आंदोलन की आवश्यकता है।’’


