झालमुड़ी से माछ-भात तक…बंगाल चुनाव में खाने की ‘सियासी जंग’ ने मचाया बवाल!

पश्चिम बंगाल चुनाव में अब खाने की सियासत भी चर्चा में है, मोदी का झालमुड़ी मोमेंट और चंपाई सोरेन का माछ-भात पोस्ट राजनीतिक संदेश के रूप में वायरल हो रहे हैं

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डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अब सिर्फ रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रह गए हैं। यह अब सांस्कृतिक संकेतों और सोशल मीडिया के विजुअल नैरेटिव की भी जंग बन चुका है। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झारग्राम में झालमुड़ी खाते हुए तस्वीर ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। अब उसी कड़ी में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की माछ-भात खाते हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। चंपाई सोरेन ने यह तस्वीर एक्स पर पोस्ट की, जिसमें वे माछ-भात का आनंद लेते दिख रहे हैं। इसके साथ लिखा गया कि वह बंगाल चुनाव प्रचार के बीच यह स्थानीय स्वाद ले रहे हैं। इसे कई लोग ममता बनर्जी के उस बयान का जवाब मान रहे हैं, जिसमें उन्होंने भाजपा पर सत्ता में आने पर बंगाल में मछली, मांस और अंडे पर रोक लगाने का आरोप लगाया था। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और यूजर्स इसे राजनीतिक बयानबाजी पर सीधा तंज बता रहे हैं।

मोदी का झालमुड़ी मोमेंट भी चर्चा में

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारग्राम की रैली के दौरान अचानक रुककर एक स्थानीय ठेले से झालमुड़ी मंगवाई थी। उन्होंने उसे खाते हुए लोगों से बातचीत भी की और मजाक में यह तक कह दिया कि “दिमाग नहीं खाते।” यह पल तुरंत वायरल हो गया। भाजपा इसे बंगाल की संस्कृति से जुड़ाव का संकेत बता रही है, जबकि टीएमसी ने इसे एक “अनियोजित शो” बताते हुए कहा कि इससे विपक्षी कार्यक्रमों पर असर पड़ा।

खाने के बहाने सियासी संदेश?

बंगाल की राजनीति में अब खाना भी एक बड़ा प्रतीक बनता जा रहा है। एक तरफ मोदी का झालमुड़ी मोमेंट, तो दूसरी तरफ चंपाई सोरेन का माछ-भात वाला पोस्ट-दोनों ही बंगाल की पहचान से जुड़ने की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी चुनाव प्रचार के लिए बंगाल पहुंचे थे, लेकिन मोदी की रैली के चलते झारग्राम में उनका हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर सका। अब सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ सहज पल हैं या फिर मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की सोची-समझी राजनीतिक रणनीति? 4 मई को आने वाले नतीजे बताएंगे कि यह ‘फूड पॉलिटिक्स’ का दांव कितना असरदार साबित हुआ।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।