
विष्णु नागर
देश के गृहमंत्री का पद खाली है। इसे यों भी कह सकते हैं कि पश्चिम बंगाल चुनाव ने यह बहुत अच्छी तरह दिखा दिया है कि देश गृहमंत्री के बगैर भी चल सकता है बल्कि गृहमंत्री ही क्यों प्रधानमंत्री के बिना भी चल सकता है। उनका ज्यादातर समय कपड़े बदलने और दस रुपए में झालमुड़ी का एक पैकेट खरीदने जैसे नाटक करने में बीतता है। 58 बार कांग्रेस -कांग्रेस का जाप कर प्रमुदित होने में व्यतीत होता है।
इनके लिए पद की उपयोगिता अपने विरोधियों की हवा टाइट करना, छापे मारना, उन्हें जेल भेजना, धमकी देना, मुकदमों में फंसाना, अर्बन नक्सल साबित करना, देश की कीमत पर एक खास पूंजीपति के हितों का मर्यादाओं की सारी सीमाएं तोड़ कर फ़िक्र करना है, इसलिए इन्हें अकुंठ सत्ता चाहिए। बाकी जनता तो बहाना है। चुनाव तो बस लोकतंत्र के भ्रम को कायम रखने का बहाना है। वोट काटने और वोट चुराने की सुविधा है। इन्हें देश से कोई मतलब नहीं। देश इनके लिए एक सुविधा है, पद है, पैसा है, फिजूलखर्ची का, अपने कर्मों पर पर्दा डालने का बहाना है, मुफ्त का तोहफा है।
देश के लोग इनके लिए पांच किलो अनाज हैं।देश की गरीब औरतें इनके लिए आठ या दस हजार रुपया हैं। देश इनके लिए हिंदू- मुसलमान करने का साधन है।देश इनके लिए अमेरिका का सस्ता चारा है। देश इनके लिए सारी संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं को बर्बाद करने का औजार है। देश इनके लिए पचास साल राज करने का सपना है।

लेखक ख्यात साहित्यकार हैं।

