मनरेगा की बहाली को लेकर मजदूरों की हुंकार, VB-GRAMG का खुलकर विरोध

Archana Ekka
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Workers Demand Reinstatement of MNREGA : 20वें मनरेगा दिवस (MNREGA Day) के मौके पर रांची के नामकुम में सोमवार को सैकड़ों मनरेगा मजदूरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण परिवारों ने मजदूर महापंचायत और रैली का आयोजन किया।

यह कार्यक्रम मनरेगा बचाओ मोर्चा और NREGA वॉच के संयुक्त बैनर तले हुआ, जिसमें झारखंड के कई जिलों से लोग शामिल हुए।

नामकुम चौक से प्रखंड परिसर तक रैली

दोपहर 1 बजे Namkum Chowk से मजदूरों ने रैली निकाली, जो पुराने प्रखंड परिसर तक पहुंची। इसके बाद शाम 4 बजे तक मजदूर महापंचायत चली।

इस महापंचायत में सिमडेगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गुमला और रांची से आए सैकड़ों मजदूर और ग्रामीण परिवार शामिल हुए। महापंचायत का संचालन अफजल अनीस ने किया।

मनरेगा को बताया अधिकार, योजना नहीं

सभा में वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा कोई साधारण रोजगार योजना नहीं है, बल्कि संविधान से मिला काम का अधिकार है।

झारखंड जनाधिकार महासभा के सिराज ने कहा कि मनरेगा एक सार्वभौमिक और मांग-आधारित कानून था, लेकिन अब केंद्र सरकार गांवों में काम घटा रही है, जिससे यह योजना कमजोर हो रही है।

परिवार और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा मनरेगा

मजदूरों ने बताया कि मनरेगा से बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आजीविका और पलायन रोकने में मदद मिली है। वक्ताओं ने 60:40 नियम, मजदूरी भुगतान में देरी और बढ़ते भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता जताई।

प्रस्ताव और आगे की रणनीति

सभा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, बलराम, सीटू के शिव कुमार राय सहित कई नेताओं और मजदूर प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। अंत में VB-GRAMG के विरोध और मनरेगा की पूर्ण बहाली का प्रस्ताव पारित किया गया।

राष्ट्रपति और केंद्र सरकार तक बात पहुंचाने का फैसला

महापंचायत में यह निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपति के नाम प्रस्ताव भेजा जाएगा और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को हस्ताक्षर अभियान सौंपा जाएगा। यह भी संकल्प लिया गया कि मनरेगा की पूरी बहाली तक आंदोलन और संघर्ष जारी रहेगा।

मनरेगा का इतिहास और आज की चिंता

झारखंड नरेगा वॉच के संयोजक James Hereng ने बताया कि 2005 में लंबे जनसंघर्षों के बाद मनरेगा कानून बना और 2 फरवरी 2006 से लागू हुआ।

इस कानून ने ग्रामीण भारत को काम का अधिकार, महिलाओं को रोजगार और समान मजदूरी दी।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने आरोप लगाया कि Central Government MNREGA को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो मजदूरों के हित में नहीं है।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।