वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव बजट तैयार करने के पहले समाज के हर वर्गों से विचार-विमर्श करने में जुटे

News Aroma Media
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रांची: राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव आगामी वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बजट तैयार करने के पहले समाज के हर वर्गों से विचार-विमर्श करने में जुटे हैं।

इसी सिलसिले में वित्तमंत्री ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से आयोजित प्री-बजट संगोष्ठी में शिक्षाविद, डॉक्टर, कृषक, वैज्ञानिक, उद्यमियों और अन्य लोगों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया।

चिकित्सक, प्रोफेसर, कृषक और उद्यमी सहित समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों की ओर से सरकार को कई सुझाव दिये गये।

प्री-बजट संगोष्ठी में डॉ राजेश

कुमार, डॉ आनंद कुमार, वासुदेव दास ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में रिक्त चिकित्सकों और नर्सों, एएनएम तथा अन्य कर्मचारियों के पदों को तत्काल भरा जाए।

वहीं दूसरी ओर कोरोना काल में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के दृष्टिकोण से स्वास्थ्य मद में खर्च होने वाली राशि को 5.2 प्रतिशत से बढ़कर कम से कम छह प्रतिशत किया जाए।

शिक्षाविद् प्रो रमेश शरण, ज्यां द्रेज और डॉ जॉनसन टोप्पो ने कहा कि कोरोना काल में साक्षरता दर प्रभावित हुई है। स्कूली बच्चों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

दो वर्षों से स्कूल बंद हैं जिससे पूरी पढाई ध्वस्त हो चुकी है, जबकि बिहार और दिल्ली सहित कई राज्यों में स्कूल खुले रहे है।

शिक्षाविदों ने यह सुझाव दिया कि संक्रमण पर अंकुश लगने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में हर हाल में स्कूलों में पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। कृषक प्रेम शंकर ने बताया कि झारखंड में कृषि एवं हार्टीकल्चर के क्षेत्र में काफी संभावनाएं है।

यदि स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो यहां से फल-फूल और सब्जियों का निर्यात विदेशों में संभव है। साथ ही आर्गेनिक फार्मिंग को भी बढ़ावा दिये जाने की जरुरत है।

डॉ जीके नायर ने कहा कि सिर्फ गेंहू और धान की खेती पर हमें निर्भर नहीं रहना चाहिए। पोल्ट्री, फीसरी और गव्य पालन पर भी कृषकों को ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने सहकारिता आंदोलन को भी बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से किसानों को मदद पहुंचाने की कोशिश हुई, लेकिन इसका ज्यादा फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल पाए।

किसानों को उनकी उपज का समुचित कीमत मिले, इसके लिए बाजार की भी व्यवस्था करनी की जरुरत है।

एक्सएलआरआई के प्रबल कुमार सिंह ने छोटी-छोटी कंपनियों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड में करंज और काजू के पेड़ लगाने चाहिए इसकी अच्छी कीमत मिलती है।

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