देश की Economy हर चुनौतियों से लड़ने को तैयार, 8.5 फीसदी रहेगी वृद्धि दर

News Aroma
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नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया।

इसके बाद देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डा. वी. अनंत नागेश्वरन और प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने वित्त वर्ष 2021-22 का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

सान्याल ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था हर चुनौतियों से लड़ने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 7.3 फीसदी की गिरावट के बावजूद इस वित्त वर्ष में विकास दर 9.2 फीसदी रहेगी।

साथ ही उन्होंने वित्त वर्ष 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 8-8.5 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान जताया।

प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने सोमवार को यहां आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र लॉकडाउन में बहुत कम प्रभावित हुआ है।

इस क्षेत्र में वित्त वर्ष 2020-21 और वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में इस दौरान गिरावट देखी गई, जो अब कोरोना महामारी से पहले के स्तर से लगभग 4.1 फीसदी ऊपर है।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से से सर्विस सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा लेकिन अब यह क्षेत्र कोराना महामारी से पहले के स्तर से थोड़ा नीचे है।

सान्याल ने कहा कि सर्विस सेक्टर का वो हिस्सा जिसमें पर्यटन, यात्रा और होटल शामिल है, अभी भी महामारी से पहले के स्तर से 8.5 फीसदी नीचे है।

दरअसल, यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो अभी भी प्रभावित है। उन्होंने बताया कि कुल खपत में कोरोना महामारी से पहले की तुलना में कमी आई है।

हालांकि, अब सरकारी खपत में बहुत हद तक मज़बूती देखी जा रही है लेकिन निजी खपत अभी भी बहुत कम है।

हालांकि, निर्यात में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के विकास का एक प्रमुख पहलू रहा है, जो अब कोरोना महामारी से पहले के स्तर से काफी ऊपर है।

हालांकि, आयात में भी बहुत बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर जीडीपी कोरोना से पहले के स्तर से 1.3 फीसदी ऊपर है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के दौरान लॉकडाउन और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों की वजह से महंगाई दर में अवरोध देखा गया।

हालांकि, इस साल पाबंदियों के हटने के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 5.6 फीसदी रही।

इससे पहले राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा और राज्यसभा में मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की।

उल्लेखनीय है कि आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का पूरा लेखा-जोखा होता है। वित्त मंत्री इस दस्तावेज के जरिए यह बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था किस स्थिति में है।

सरकार की योजनाएं कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, पूरे वित्त वर्ष के दौरान विकास का क्या ट्रेंड रहा, किस क्षेत्र में कितना निवेश हुआ और योजनाओं को किस तरह अमल में लाया गया।

इस रिपोर्ट में सरकार की नीतियों और आने वाले बजट की रूप रेखा की जानकारी भी होती है।

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